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केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण म्यूनिख (जर्मनी) में आयोजित म्यूनिख सुरक्षा संवाद (Munich Security Conference) 2026 में हिस्सा लेने के लिए पहुँचीं। यह वार्षिक कार्यक्रम दुनिया के तमाम देशों के नेताओं, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को इकट्ठा करता है, जहाँ वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा होती है।
इस सम्मेलन में मुख्य रूप से वैश्विक सुरक्षा, भू-राजनीतिक तनाव और बदलते विश्व परिदृश्य पर जोर दिया जा रहा है। भारत की भागीदारी का मकसद सुरक्षा चुनौतियों के साथ जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याओं को भी एक अहम सुरक्षा मुद्दा के रूप में उभारना बताया जा रहा है — यानी अब सुरक्षा सिर्फ सीमा और शक्ति का मामला नहीं रह गया है, बल्कि पर्यावरणीय और जलवायु जोखिम भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये गंभीर विषय हैं। (एजेंसी रिपोर्ट की समीक्षा)
इस वैश्विक मंच पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधि सुरक्षा के नए रूप, साझा जोखिमों से निपटने के उपाय और समग्र रणनीति जैसे विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। भारत का रुख रहा है कि जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास को भी आधुनिक सुरक्षा विचारधारा का हिस्सा माना जाना चाहिए ताकि भविष्य-में प्राकृतिक आपदाओं, खाद्य-पानी की कमी और प्रवासन जैसे संकटों से निपटना आसान हो सके। (विश्लेषण आधारित)
निर्मला सीतारमण यहाँ उच्च-स्तरीय बैठकों और पैनल चर्चाओं में भाग लेंगी और अन्य देशों के मंत्रियों, अधिकारियों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगी। उनका मकसद है कि भारत की नीति, सहयोग और वैश्विक सुरक्षा दृष्टिकोण को साझा किया जाए और समुदाय-आधारित और टिकाऊ समाधान पर सहमति बनाने की दिशा में कदम उठाया जाए।








