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आखाती देशों में उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति के बीच महाराष्ट्र सरकार ने त्वरित और निर्णायक कदम उठाते हुए वहां फंसे राज्य के नागरिकों के लिए विशेष हेल्पलाइन सेवा शुरू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने इस संबंध में उच्चस्तरीय बैठक लेकर प्रशासन को तत्काल सहायता तंत्र सक्रिय करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही संपूर्ण रेस्क्यू और समन्वय प्रक्रिया की जिम्मेदारी राज्य के वरिष्ठ मंत्री Girish Mahajan को सौंपी गई है।
पश्चिम एशिया के कुछ आखाती देशों में हाल ही में बढ़े संघर्ष और अस्थिरता के कारण वहां कार्यरत या व्यवसाय के सिलसिले में गए भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से महाराष्ट्र के लोगों के सामने गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई स्थानों पर उड़ानों पर प्रभाव पड़ने से वापसी का मार्ग कठिन हो गया है। ऐसी परिस्थिति में राज्य सरकार ने पहल करते हुए अपने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि उनके जीवन और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाएगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य का प्रत्येक नागरिक सरकार के लिए सर्वोपरि है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने की अपील की है। सरकार द्वारा जारी किए गए हेल्पनंबर के माध्यम से नागरिक या उनके परिजन फंसे हुए व्यक्ति की जानकारी, वर्तमान स्थान और आवश्यक सहायता का विवरण दर्ज करा सकते हैं। इस जानकारी के आधार पर संबंधित भारतीय दूतावासों और केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया जाएगा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने आपात बैठक बुलाई, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, गृह विभाग और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा जाएगा ताकि राहत और बचाव कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए।
रेस्क्यू ऑपरेशन के समन्वयक बनाए गए मंत्री गिरीश महाजन पर इस पूरे अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे केंद्रीय विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों तथा स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर संवाद करेंगे। इसके अलावा जिलास्तर पर भी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है, जो प्रभावित परिवारों से सीधा संपर्क रखेंगे और जानकारी राज्य स्तर तक पहुंचाएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य है कि किसी भी नागरिक की सूचना या सहायता अनुरोध अनदेखा न हो।
सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि उड़ान सेवाएं सामान्य होते ही चरणबद्ध तरीके से फंसे नागरिकों की सुरक्षित वापसी का खाका तैयार किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर विशेष विमान सेवा की संभावना भी तलाश की जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, प्राथमिकता उन नागरिकों को दी जाएगी जो गंभीर परिस्थिति में हैं, जिनके वीज़ा या आवास संबंधी मुद्दे हैं या जिनके पास बुनियादी संसाधनों की कमी है।
दुबई स्थित इंडियन्स पीपल्स फोरम द्वारा भी सहायता के लिए हेल्पलाइन जारी की गई है। संकटग्रस्त नागरिक +97150635435 इस व्हाट्सएप नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। राज्य सरकार इस फोरम और अन्य सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर समन्वित प्रयास कर रही है, ताकि सहायता कार्य अधिक प्रभावी और तेज़ हो सके।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह भी आश्वासन दिया है कि संकटग्रस्त नागरिकों के परिजनों से सतत संवाद रखा जाएगा। प्रशासन द्वारा समय-समय पर स्थिति की अद्यतन जानकारी साझा की जाएगी ताकि परिवारों में अनिश्चितता और भय का माहौल न बने। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में अपने नागरिकों के साथ खड़ी है और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
राज्य सरकार के इस कदम को मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित प्रशासनिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न संकट की घड़ी में राज्य का अपने नागरिकों के प्रति यह दायित्वपूर्ण रुख प्रशासनिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वर्तमान परिस्थितियों में जहां विदेशों में कार्यरत भारतीयों के समक्ष चुनौतीपूर्ण हालात बने हुए हैं, वहीं महाराष्ट्र सरकार की यह पहल एक सकारात्मक संदेश देती है कि सरकार न केवल घरेलू मुद्दों तक सीमित है, बल्कि राज्य के नागरिक जहां भी हों, उनकी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए तत्पर है।
आखाती देशों में जारी अस्थिरता के बीच यह पहल समयानुकूल और दूरदर्शी मानी जा रही है। हेल्पलाइन और समन्वय तंत्र के माध्यम से आने वाले दिनों में राहत और बचाव कार्य को गति मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने विश्वास जताया है कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से सभी प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जाएगा और उनके परिवारों को राहत मिलेगी।








