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भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम सामने आया है। दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और साझेदारी को लेकर बड़ा समझौता होने की संभावना जताई जा रही है।
यह खनिज आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।
कॉन्क्लेव में सामने आई अहम जानकारी
Sergio Gor ने India Today Conclave के दौरान कहा कि अमेरिका भारत को एक अहम रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।
उन्होंने बताया कि दोनों देश क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत करने और इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।
क्यों अहम हैं क्रिटिकल मिनरल्स?
क्रिटिकल मिनरल्स में लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और दुर्लभ धातुएं शामिल होती हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, मोबाइल फोन, कंप्यूटर चिप, रक्षा उपकरण और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक में होता है।
दुनिया भर में इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए कई देश इनके सुरक्षित और स्थिर स्रोत सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता
भारत तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में क्रिटिकल मिनरल्स की स्थिर सप्लाई देश के लिए बेहद जरूरी है।
अमेरिका के साथ सहयोग से भारत को नई तकनीक, निवेश और खनिज संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।
रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग सिर्फ खनिजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रक्षा, ऊर्जा और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के रिश्तों को और मजबूत करेगा।
आने वाले समय में दोनों देश वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और स्थिर बनाने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।








