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आईपीएल 2026 में अपने विस्फोटक प्रदर्शन से सुर्खियों में आए युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एंट्री की मांग तेज हो गई है। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से अपील की है कि इस 15 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी को जल्द से जल्द भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर भेजा जाए।
वैभव सूर्यवंशी ने हाल ही में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ खेले गए मैच में मात्र 17 गेंदों में 52 रनों की तूफानी पारी खेलकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस पारी में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और बड़े शॉट खेलने की क्षमता ने क्रिकेट जगत को चौंका दिया। इस प्रदर्शन के बाद उनकी तुलना भारतीय टीम के युवा स्टार यशस्वी जायसवाल से की जाने लगी है।
माइकल वॉन का मानना है कि सूर्यवंशी को भले ही तुरंत प्लेइंग इलेवन में जगह न मिले, लेकिन उन्हें भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर ले जाना चाहिए ताकि वह सीनियर खिलाड़ियों के साथ समय बिताकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव हासिल कर सकें। वॉन ने कहा कि ऐसे युवा खिलाड़ी को सही माहौल और मार्गदर्शन मिलना बेहद जरूरी है, जिससे वह भविष्य में टीम के लिए एक बड़ा मैच विनर साबित हो सके।
पिछले एक साल में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। उन्होंने न सिर्फ आईपीएल में बल्कि अंडर-19 क्रिकेट में भी अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है। इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में शतक जड़कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई थी।
आईपीएल 2026 के पहले ही मैच में सूर्यवंशी ने जिस अंदाज में बल्लेबाजी की, उसने यह साबित कर दिया कि वह बड़े मंच के लिए पूरी तरह तैयार हैं। खास बात यह रही कि उन्होंने अनुभवी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल के साथ ओपनिंग करते हुए ज्यादा आक्रामक भूमिका निभाई और रन बनाने का जिम्मा अपने ऊपर लिया।
चेन्नई के खिलाफ मैच में दोनों के बीच 75 रनों की साझेदारी हुई, लेकिन सूर्यवंशी ने 17 गेंदों में 52 रन बनाकर पूरी लाइमलाइट बटोर ली, जबकि यशस्वी जायसवाल ने 36 गेंदों में 38 रन बनाकर टीम को स्थिरता दी। माइकल वॉन ने इस पारी को लेकर कहा कि सूर्यवंशी की बल्लेबाजी में जो निडरता और आक्रामकता दिखी, वह उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
वॉन ने यह भी कहा कि सूर्यवंशी गेंद को सिर्फ खेलने के बजाय उसे बाउंड्री के पार भेजने के इरादे से बल्लेबाजी करते हैं, जो आधुनिक क्रिकेट की मांग है। वहीं जायसवाल ने परिस्थिति के अनुसार संयमित खेल दिखाया, जो टीम के लिए भी उतना ही जरूरी था। दोनों की पारियों को वॉन ने अलग-अलग शैली का बेहतरीन उदाहरण बताया।
मैच के बाद वैभव सूर्यवंशी ने खुलासा किया कि यशस्वी जायसवाल ने उन्हें सलाह दी थी कि वह अपनी लय बनाए रखें और जब गेंद अच्छी आ रही हो तो बड़े शॉट खेलने से न हिचकिचाएं। इस सलाह का उन्होंने बखूबी फायदा उठाया और टीम को शानदार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
अब सवाल यह उठता है कि क्या BCCI इतनी कम उम्र में किसी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय दौरे पर भेजेगा? क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, लेकिन साथ ही खिलाड़ी के मानसिक और शारीरिक विकास का भी ध्यान रखना जरूरी होता है। ऐसे में चयनकर्ताओं को संतुलित फैसला लेना होगा।
BCCI के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के सामने अब एक बड़ी चुनौती है कि वह इस युवा खिलाड़ी को कैसे और कब अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौका दें। अगर सूर्यवंशी को इंग्लैंड दौरे पर शामिल किया जाता है, तो यह उनके करियर के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, वैभव सूर्यवंशी का उदय भारतीय क्रिकेट के लिए एक सकारात्मक संकेत है। उनकी प्रतिभा, आत्मविश्वास और आक्रामक शैली उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा बना सकती है। अब देखना यह होगा कि BCCI और टीम मैनेजमेंट इस उभरते हुए खिलाड़ी को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और क्या उन्हें जल्द ही भारतीय टीम की जर्सी में खेलने का मौका मिलता है।








