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ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों ने रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। देश में पेट्रोल की कीमत 458.40 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इस अभूतपूर्व बढ़ोतरी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है और देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब Strait of Hormuz में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20% इसी मार्ग से गुजरता है, और यहां किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है।
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री Ali Pervaiz Malik ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण यह निर्णय लेना पड़ा। उनके अनुसार, यह वृद्धि “टाली नहीं जा सकती थी” क्योंकि वैश्विक बाजार में कीमतें बेकाबू हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के चलते तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिसका सीधा असर पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ा।
पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। खासतौर पर Saudi Arabia और United Arab Emirates से आने वाला तेल उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है। यह तेल भी मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है।
ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट या तनाव का सीधा असर पाकिस्तान की सप्लाई चेन पर पड़ता है। यही कारण है कि पिछले कुछ हफ्तों में वहां ईंधन की कीमतों में 40% से 50% तक की भारी बढ़ोतरी देखी गई है।
ईंधन की कीमतों में इस उछाल का असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। परिवहन महंगा होने से खाद्य वस्तुओं, सब्जियों और दैनिक जरूरत की चीजों के दाम भी तेजी से बढ़ने की आशंका है।
पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। महंगाई दर पहले से ही ऊंचे स्तर पर है, और अब ईंधन कीमतों में वृद्धि से स्थिति और बिगड़ने का खतरा है।
जनता पर बढ़ते बोझ को कम करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने कुछ राहत उपायों की घोषणा की है। वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb ने बताया कि:
- दोपहिया वाहन चालकों को 3 महीने तक प्रति माह 20 लीटर पेट्रोल पर 100 रुपये प्रति लीटर सब्सिडी दी जाएगी
- किसानों के लिए विशेष सहायता पैकेज लागू किया गया है
- छोटे किसानों को प्रति एकड़ 1500 रुपये की एकमुश्त सहायता दी जाएगी
सरकार का मानना है कि कृषि क्षेत्र, जो देश की GDP का लगभग 24% योगदान देता है, उसे बचाना बेहद जरूरी है ताकि खाद्य सुरक्षा बनी रहे।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि लगातार सब्सिडी देना अब संभव नहीं है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के अनुसार, पिछले तीन हफ्तों में ही सरकार 129 अरब रुपये की सब्सिडी दे चुकी है।
उन्होंने साफ कहा कि सीमित संसाधनों और लंबे समय तक जारी रहने वाले संकट के कारण सभी को समान रूप से सब्सिडी देना संभव नहीं है। इससे आने वाले समय में और कठिन फैसले लिए जा सकते हैं।
ईंधन की यह स्थिति केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि के कारण कई देशों में महंगाई बढ़ रही है और आर्थिक अस्थिरता का खतरा पैदा हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Strait of Hormuz में स्थिति सामान्य नहीं होती, तो आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
पाकिस्तान के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। एक ओर उसे अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है, तो दूसरी ओर आर्थिक संतुलन भी बनाए रखना है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो देश में और भी महंगाई देखने को मिल सकती है।
पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह भारी उछाल न केवल वहां की अर्थव्यवस्था बल्कि आम जनता के जीवन पर भी गहरा असर डाल रहा है। यह संकट इस बात का संकेत है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का असर कितनी तेजी से देशों की आंतरिक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात कब सामान्य होते हैं और पाकिस्तान सरकार इस संकट से निपटने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।








