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  • जितेंद्र आव्हाड के घोड़ा आंदोलन पर सदाभाऊ खोत का तीखा हमला, बोले – “जिस घोड़े पर आप बैठे, वह उस घोड़े का भी अपमान है”

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    महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता जितेंद्र आव्हाड द्वारा किए गए घोड़ा आंदोलन पर अब किसान नेता सदाभाऊ खोत ने जोरदार हमला बोला है। महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के विरोध में आव्हाड ने ठाणे में घोड़े पर बैठकर आंदोलन किया था। लेकिन इस आंदोलन के बाद सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है।

    मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कुछ महत्वपूर्ण अपीलें की थीं। उन्होंने लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने और पेट्रोल-डीजल की बचत करने की बात कही थी। सरकार का कहना है कि बढ़ते डॉलर रेट और विदेशी मुद्रा पर दबाव को देखते हुए यह कदम जरूरी है।

    लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया। राज ठाकरे और राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए।

    इसी विरोध के तहत जितेंद्र आव्हाड ने ठाणे में राष्ट्रवादी कांग्रेस कार्यालय से लेकर महानगरपालिका मुख्यालय तक घोड़े पर बैठकर प्रदर्शन किया। इस दौरान बैलगाड़ियों का भी इस्तेमाल किया गया।

    आंदोलन के दौरान आव्हाड ने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता महंगाई से परेशान है, जबकि सरकार केवल दिखावे की राजनीति कर रही है।

    उन्होंने कहा,
    “देश में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। आम आदमी परेशान है, लेकिन सरकार को इसकी चिंता नहीं है।”

    इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है।

    आव्हाड के इस आंदोलन के बाद सदाभाऊ खोत ने सोशल मीडिया के जरिए उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,

    “मोदी जी की अपील आपको क्या समझ में आएगी? गधा क्या जाने गुड़ क्या चीज होती है?”

    इतना ही नहीं, उन्होंने घोड़े को लेकर भी तंज कसते हुए कहा,

    “जिस घोड़े पर आप बैठे थे, वह उस घोड़े का भी अपमान है। इसी घोड़े की पीठ पर बैठकर इतिहास रचा गया था, महाराष्ट्र गर्व से खड़ा हुआ था और राष्ट्र मजबूत बना था।”

    खोत के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

    जितेंद्र आव्हाड के आंदोलन और सदाभाऊ खोत की प्रतिक्रिया को लेकर सोशल मीडिया पर भी जमकर बहस हो रही है। समर्थक और विरोधी दोनों ही अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

    एक तरफ विपक्ष महंगाई और आर्थिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने में जुटा है, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी पक्ष विपक्ष के आंदोलनों को केवल राजनीतिक ड्रामा बता रहा है।

    महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गर्माने की संभावना दिखाई दे रही है।

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