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  • दिल्ली में TMC के भीतर बढ़ी हलचल: बागी सांसदों की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात, ममता बनर्जी की पार्टी में बड़ी टूट की अटकलें तेज

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    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। पार्टी को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं और अब कई सांसदों की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं और आने वाले दिनों में पार्टी को बड़े राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

    सोमवार को TMC को उस समय बड़ा झटका लगा जब वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अपनी राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया।

    उनका इस्तीफा ऐसे समय आया जब पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली में विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन की बैठक में भाग लेने पहुंची थीं। सुखेंदु शेखर रॉय लंबे समय से पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते रहे हैं, इसलिए उनके इस्तीफे को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इस्तीफे के कुछ ही समय बाद दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों की बैठक होने की खबर सामने आई। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।

    बताया जा रहा है कि बैठक में शामिल सांसदों में काकली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, शताब्दी रॉय, असित कुमार मल, बापी हलदर, जून मालिया, जगदीश बसुनिया, कालीपद सोरेन, अरूप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक और शर्मिला सरकार सहित कई सांसदों के नाम चर्चा में हैं।

    हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इस मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक मुद्दों को लेकर असंतोष बढ़ा है। कई नेताओं और सांसदों द्वारा समय-समय पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताने के संकेत भी सामने आते रहे हैं।

    सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे ने इस असंतोष को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।

    पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता और पूर्व TMC नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि सुखेंदु शेखर रॉय द्वारा उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं और संसद की कार्यप्रणाली को लेकर उनकी चिंताएं उचित हैं।

    उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में अन्य नेता भी अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर सकते हैं।

    वर्तमान में पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की कुल 17 सीटों में से 13 सीटें तृणमूल कांग्रेस के पास हैं, जबकि 3 सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में हैं।

    राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार यदि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता है तो इसका असर संसद में भी देखने को मिल सकता है। पिछले दिनों सुखेंदु शेखर रॉय ने भी संकेत दिया था कि आने वाले समय में लोकसभा और राज्यसभा के कुछ अन्य सांसद भी महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं।

    फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन घटनाक्रमों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन दिल्ली में हुई बैठकों और वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है।

    आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह असंतोष केवल व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित है या फिर पार्टी के भीतर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत है।

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