ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में भारत सरकार की ओर से एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। सूत्रों के अनुसार, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा 4 और 5 जुलाई को तेहरान में आयोजित होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे और उनकी ओर से दोनों वरिष्ठ प्रतिनिधि भारत का पक्ष रखेंगे।
चार और पांच जुलाई को होंगे अंतिम संस्कार के मुख्य कार्यक्रम
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े प्रमुख धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम 4 एवं 5 जुलाई को तेहरान में आयोजित किए जाएंगे।
4 जुलाई को तेहरान के ग्रैंड मोसाला कॉम्प्लेक्स में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद राजधानी तेहरान और पवित्र शहर कोम में विशाल सार्वजनिक जुलूस निकाले जाएंगे। वहीं इराक के नजफ और कर्बला में भी उनके सम्मान में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाएंगी।
फरवरी में हुई थी खामेनेई की मौत
अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी 2026 को हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए सैन्य हमले में उनकी मौत हुई थी। इस हमले में उनकी पत्नी सहित कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी मारे जाने की खबर सामने आई थी।
हालांकि उस समय क्षेत्र में जारी सैन्य संघर्ष और सुरक्षा कारणों से उनका अंतिम संस्कार तत्काल नहीं किया जा सका। इसके चलते अंतिम संस्कार की सभी रस्में लगभग चार महीने बाद जुलाई में आयोजित की जा रही हैं।
लंबे समय तक संभाली ईरान की सर्वोच्च जिम्मेदारी
अयातुल्ला अली खामेनेई ने वर्ष 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर का पद संभाला था। पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक उन्होंने देश की सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक सत्ता का नेतृत्व किया।
उनके कार्यकाल में ईरान की विदेश नीति, परमाणु कार्यक्रम और पश्चिमी देशों के साथ संबंध लगातार वैश्विक चर्चा का विषय बने रहे।
भारत-ईरान संबंधों को मिलेगा महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम संस्कार में भारत के प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी दोनों देशों के पारंपरिक कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक मानी जाएगी।
भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार, चाबहार बंदरगाह परियोजना तथा क्षेत्रीय रणनीतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर लंबे समय से साझेदारी रही है। ऐसे में भारत की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।





