तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने वर्ष 2025 में करूर में हुई दर्दनाक भगदड़ की घटना को लेकर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। करूर दौरे के दौरान उन्होंने पुलिस प्रशासन और विपक्षी डीएमके (DMK) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस पर भरोसा किया, लेकिन बाद में पूरी घटना की जिम्मेदारी उनके सिर मढ़ दी गई।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि करूर भगदड़ उनके जीवन के सबसे दर्दनाक क्षणों में से एक है और वह घटना आज भी उन्हें भीतर तक झकझोर देती है।
“अगर खतरा था तो मुझे रोका क्यों नहीं?”
जनसभा को संबोधित करते हुए विजय ने कहा कि जब वह करूर पहुंचे थे, तब पुलिस के पास रैली रोकने का पूरा अधिकार था।
उन्होंने कहा,
“मैंने पुलिस पर भरोसा किया। अगर हालात ठीक नहीं थे तो मुझे शहर में प्रवेश करने से रोका जा सकता था। सभा रद्द की जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मुझे आगे बढ़ने दिया गया और बाद में पूरी जिम्मेदारी मेरे ऊपर डाल दी गई।”
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन को भीड़ को लेकर आशंका थी, तो पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
डीएमके पर लगाए राजनीतिक साजिश के आरोप
मुख्यमंत्री विजय ने अपने संबोधन में विपक्षी डीएमके पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भगदड़ की घटना के बाद राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि जब वह इस त्रासदी से मानसिक रूप से टूट चुके थे, तब उनके विरोधियों ने उनकी चुप्पी को मुद्दा बनाया और उन पर लगातार राजनीतिक हमले किए।
विजय ने दावा किया कि इस पूरी घटना को लेकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई और राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास हुआ।
“41 लोगों की मौत आज भी भूल नहीं सकता”
मुख्यमंत्री ने कहा कि करूर भगदड़ में 41 लोगों, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे, की मौत उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद दुखद रही।
उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक जीवन में सफलता से बड़ी इंसानी जान होती है और इस हादसे की पीड़ा उनके साथ हमेशा रहेगी।
सरकारी नौकरी देने के फैसले पर विवाद
इस बीच तमिलनाडु सरकार द्वारा भगदड़ में जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के फैसले को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है।
डीएमके ने आरोप लगाया कि जांच पूरी होने से पहले यह फैसला गवाहों को प्रभावित कर सकता है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने पहले सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री किसी मामले में आरोपी नहीं हैं और सरकार की नीतिगत निर्णय प्रक्रिया में अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसके बाद डीएमके ने अपनी याचिका वापस ले ली।
हाई कोर्ट ने भी दी राहत
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने भी सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देना राज्य सरकार का नीतिगत फैसला है।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियुक्तियां फिलहाल अस्थायी रहेंगी और अंतिम फैसला न्यायालय के निर्णय के अधीन होगा।
CBI जांच जारी
करूर भगदड़ मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। विपक्ष ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की है, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि पीड़ित परिवारों को राहत देना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
राजनीतिक माहौल गर्म
मुख्यमंत्री विजय के ताजा बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। जहां सत्तारूढ़ पक्ष इसे सच्चाई सामने लाने की कोशिश बता रहा है, वहीं विपक्ष उनके आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है।
अब सभी की नजर CB








