तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले की एक सब-जेल में 35 वर्षीय दिव्यांग व्यक्ति सबरी वर्मन की कथित हिरासत में मौत के मामले ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। विपक्षी दल DMK ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधते हुए सवाल किया है कि जब विपक्ष में थे तब हिरासत में मौत के मामलों पर मुखर रहते थे, लेकिन अब मुख्यमंत्री बनने के बाद इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।
DMK के नेताओं ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
सबरी वर्मन को 9 जुलाई को दक्षिण थामरैकुलम पुलिस ने कथित रूप से गुटखा बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन्हें कन्याकुमारी जिले की सब-जेल में रखा गया, जहां 13 जुलाई की सुबह उनकी मौत हो गई।
मृतक के परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर आरोप लगाया कि जेल के भीतर उनकी बेरहमी से पिटाई की गई, जिसके कारण उनकी मौत हुई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 19 चोटों के निशान मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
तीन जेल कर्मचारी गिरफ्तार
पुलिस जांच और जेल परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद सामने आया कि 12 जुलाई की रात जेल के अंदर सबरी वर्मन के साथ कथित मारपीट हुई थी।
इस मामले में मुख्य वार्डन एन. सुरेश सहित तीन जेल कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस आगे की जांच में जुटी हुई है।
DMK ने मुख्यमंत्री विजय को घेरा
विपक्ष के नेता उधयनिधि स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि राज्य के गृह विभाग की जिम्मेदारी सीधे मुख्यमंत्री के पास है, इसलिए उन्हें इस घटना की परिस्थितियों पर जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
DMK नेताओं ने आरोप लगाया कि जब उनकी पार्टी सत्ता में थी, तब विजय हिरासत में मौत के मामलों पर लगातार सरकार को घेरते थे, लेकिन अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।
DMK नेता परंथामेन ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक हिरासत मौत के मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पीड़ित परिवार से माफी मांगी थी। उस समय विजय ने कहा था कि “हमें माफी नहीं, न्याय चाहिए।”
अब DMK का कहना है कि वही मांग आज जनता मुख्यमंत्री विजय से कर रही है।
मामले पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
DMK प्रवक्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार को केवल बयान देने के बजाय पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं सरकार की ओर से मामले की जांच जारी होने की बात कही गई है।
इस बीच, तीन जेल कर्मियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।








