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पंजाब सरकार द्वारा राज्य में कपास उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से ‘Mission for Cotton Productivity’ के अंतर्गत व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में श्री मुक्तसर साहिब जिले के बधाई सर्किल स्थित मुक्तसर देहाती गांव में 13 और 14 जुलाई 2026 को दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मुख्य कृषि अधिकारी श्री मुक्तसर साहिब डॉ. जगसीर सिंह के दिशा-निर्देश तथा सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. राजविंदर सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को कपास की बेहतर खेती, कीट प्रबंधन, उर्वरक संतुलन, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उनकी आय और उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विकास अधिकारी डॉ. मनमीत सिंह ने किसानों का स्वागत करते हुए की। उन्होंने बताया कि मिशन का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं बल्कि किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों का सही उपयोग कर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञ डॉ. जोबनदीप सिंह ने किसानों को कपास की फसल में उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार खाद का प्रयोग करने से उत्पादन बढ़ता है, लागत कम होती है और भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।
इसके बाद डॉ. शविंदर सिंह ने धान एवं बासमती की डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक पर किसानों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से पानी की बचत होती है, श्रम लागत कम होती है और खेती अधिक लाभकारी बनती है। किसानों ने इस विषय पर विशेषज्ञों से कई प्रश्न पूछे, जिनका विस्तार से समाधान किया गया।
कार्यक्रम में श्रीमती अमरदीप कौर ने किसानों को मिट्टी एवं पानी की जांच कराने के महत्व के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि नियमित परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का सही उपयोग संभव है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।
वहीं श्रीमती नवदीप कौर ने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, किसान रजिस्ट्रेशन तथा अन्य सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों से समय पर पंजीकरण कराने और सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे उप निदेशक (कपास) डॉ. चरणजीत सिंह, जिन्होंने किसानों को कपास की फसल को गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) और सफेद मक्खी (Whitefly) जैसे खतरनाक कीटों से बचाने के वैज्ञानिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि समय-समय पर खेतों का निरीक्षण करना अत्यंत आवश्यक है ताकि प्रारंभिक अवस्था में ही कीटों की पहचान कर उचित नियंत्रण किया जा सके।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेतों में खरपतवार की नियमित सफाई करें क्योंकि यही कई कीटों के पनपने का प्रमुख कारण बनते हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. राजविंदर सिंह ने किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न किसान कल्याण योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से किसानों से अपील की कि बीज, खाद या कृषि रसायन खरीदते समय हमेशा अधिकृत विक्रेता से पक्का बिल अवश्य लें ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट का उपयोग ही बेहतर उत्पादन की पहली शर्त है। नकली बीज, खाद और कीटनाशकों से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसलिए खरीदारी में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को आधुनिक कृषि प्रबंधन, संतुलित पोषण, फसल संरक्षण, जल संरक्षण तथा सरकारी सहायता योजनाओं के बारे में व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनकी स्थानीय समस्याओं के समाधान भी सुझाए।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कृषि विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाने, नियमित खेत निरीक्षण करने तथा कृषि विशेषज्ञों के संपर्क में रहने की अपील की। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन क्षमता में सुधार लाने और पंजाब में कपास की खेती को पुनः मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन में गगनदीप सिंह (ATM) तथा अमनदीप सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में लखेवाली सर्किल सहित आसपास के अनेक गांवों के प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति अपनी रुचि दिखाई।
पंजाब सरकार का ‘Mission for Cotton Productivity’ राज्य में कपास उत्पादन बढ़ाने, किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित करने तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इन वैज्ञानिक सुझावों को अपनाते हैं तो आने वाले वर्षों में पंजाब की कपास उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।








