महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे ने 29 अगस्त से आंदोलन करने की घोषणा की है। इस बीच राज्य के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण मनोज जरांगे को आंदोलन करने की नौबत नहीं आएगी।
मीडिया से बातचीत के दौरान विखे पाटिल ने कहा कि सरकार मराठा समाज के हित में लगातार काम कर रही है और आरक्षण से जुड़े फैसलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बताया कि सरकार ने मराठा समाज के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- बंद की गई छात्रवृत्ति योजनाओं को फिर से शुरू किया गया है।
- मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 32 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का फैसला लिया गया है।
- लाभार्थियों को महामंडल और एमआईडीसी में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
- सारथी संस्थान में UPSC प्रशिक्षण के लिए सीटों की संख्या बढ़ाकर 400 कर दी गई है।
- हैदराबाद गजट के क्रियान्वयन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की गई है।
- सभी जिला कलेक्टरों को हेल्पलाइन शुरू करने और हर सोमवार प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
- जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
मंत्री ने बताया कि शिंदे समिति अब तक 58 लाख रिकॉर्ड खोजने का कार्य कर चुकी है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। समिति का कार्यकाल 2027 तक बढ़ा दिया गया है, ताकि आरक्षण से जुड़े मामलों का प्रभावी समाधान किया जा सके।
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सरकार मराठा समाज के मुद्दों को लेकर पूरी तरह सकारात्मक और गंभीर है।
विखे पाटिल ने आरोप लगाया कि महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैसले रद्द किए गए थे, जिससे मराठा समाज को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने उन योजनाओं को फिर से शुरू कर समाज के हित में कई बड़े निर्णय लिए हैं।
अभिजीत दीपके के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विखे पाटिल ने कहा कि यदि उन्हें किसी से धमकी मिली है तो उन्हें संबंधित व्यक्ति का नाम सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर आंदोलन के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि समाज में भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल मनोज जरांगे अपनी 29 अगस्त से प्रस्तावित आंदोलन की घोषणा पर कायम हैं। ऐसे में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में आ गया है।








