जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। पार्टी ने आने वाले वर्षों में Gen Z (युवा) मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए विशेष रणनीति तैयार करने का निर्णय लिया है।
2029 के चुनावों पर नजर
सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2029 तक देश में लगभग 38 करोड़ Gen Z मतदाता होंगे। इसे देखते हुए शिवसेना जल्द ही एक अहम बैठक आयोजित करेगी, जिसमें युवाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचने और उन्हें पार्टी से जोड़ने की रणनीति तैयार की जाएगी।
युवा नेतृत्व को मिलेगा मौका
पार्टी ऐसे युवा चेहरों को आगे लाने की तैयारी कर रही है, जो Gen Z मतदाताओं के बीच प्रभाव रखते हों। इसके लिए पार्टी नेताओं की युवा पीढ़ी के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों में सक्रिय युवाओं को भी जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा रहा है।
शहर और गांवों में होंगे युवा सम्मेलन
शिवसेना शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष युवा सम्मेलन और मेले आयोजित करने की योजना बना रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि युवाओं के शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अभी से गंभीरता से काम करना आवश्यक है।
नेताओं को दिए गए निर्देश
सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पार्टी के सभी पदाधिकारियों और नेताओं को युवाओं की समस्याओं पर प्राथमिकता से काम करने और उनके बीच लगातार संवाद बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
छात्र आंदोलन के बाद बदली राजनीतिक रणनीति
हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए थे। इस आंदोलन के बाद राजनीतिक दलों का ध्यान युवा मतदाताओं की ओर अधिक केंद्रित हुआ है। इसी कड़ी में शिवसेना ने भी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए Gen Z युवाओं के लिए विशेष राजनीतिक रणनीति तैयार करने की पहल शुरू कर दी है।








