ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार को ईरान द्वारा अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष बातचीत से इनकार किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी ने भी बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया।
वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2.8 प्रतिशत बढ़कर 86.15 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 2 प्रतिशत की तेजी के साथ 82 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता दिखाई दिया।
ईरान ने बातचीत से किया इनकार
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष वार्ता की संभावना से इनकार कर दिया है। इससे मध्य पूर्व में जारी तनाव और बढ़ गया है। इससे पहले अमेरिका की ओर से संकेत दिए गए थे कि ओमान की मध्यस्थता में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत हो सकती है।
ट्रंप की सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समझौते के लिए “आखिरी मौका” बताते हुए चेतावनी दी कि यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा कि स्थिति का जल्द फैसला हो जाएगा और अब ज्यादा समय नहीं बचा है।
ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक निवेशकों में चिंता बढ़ गई और तेल बाजार में खरीदारी तेज हो गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) के परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर डाल सकती है।
रूस और कजाकिस्तान की सप्लाई पर भी नजर
बाजार की नजर केवल ईरान-अमेरिका तनाव पर ही नहीं, बल्कि रूस और कजाकिस्तान से होने वाली तेल आपूर्ति पर भी बनी हुई है। जुलाई के दौरान काला सागर क्षेत्र और रूस के तेल निर्यात ढांचे पर हुए हमलों ने आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
हालांकि कुछ स्थानों पर तेल लोडिंग दोबारा शुरू हुई है, लेकिन वैश्विक बाजार अभी भी संभावित आपूर्ति बाधाओं को लेकर सतर्क बना हुआ है।
महंगाई पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो इसका असर दुनिया भर में ईंधन की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि ऊंचे कच्चे तेल के दाम आयात बिल बढ़ाने के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी दबाव डाल सकते हैं।








