ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों में प्रतिभा और मेहनत की कोई कमी नहीं होती, लेकिन गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन, अनुशासित वातावरण और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की सही तैयारी के अवसर हर विद्यार्थी तक पहुंच पाना हमेशा आसान नहीं होता। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट ग्रामीण विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है।
संस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को सैनिक स्कूल, राष्ट्रीय मिलिटरी स्कूल और जवाहर नवोदय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयार करना है। अल्प समय में ही संस्थान ने उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए हैं और विद्यार्थियों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
चैतन्य सुरेश कासार की दूरदृष्टि से हुई शुरुआत
सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट के संस्थापक श्री चैतन्य सुरेश कासार हैं। सह-संस्थापक ओंकार सर और कासार मैडम के संयुक्त प्रयासों से संस्थान की नींव रखी गई।
विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, देशभक्ति और प्रतियोगी भावना विकसित करना संस्था के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। संस्था का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी वही अवसर और मार्गदर्शन मिले, जो बड़े शहरों में उपलब्ध विद्यार्थियों को मिलता है।
संस्था की शुरुआत 2 मई 2025 को बुलढाणा जिले के मेहकर तालुका स्थित विवेकानंद नगर, हिवरा आश्रम में ऑफलाइन पद्धति से हुई थी।
ग्रामीण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ शुरू हुआ यह प्रयास शुरुआत में सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बीच आगे बढ़ा। हालांकि, संस्थापक और उनकी टीम की मेहनत एवं निरंतर प्रयासों ने संस्था को मजबूत आधार प्रदान किया।
AISSEE, RMS और JNV की तैयारी
सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट में राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।
इनमें प्रमुख रूप से:
- AISSEE – All India Sainik Schools Entrance Examination
- RMS – Rashtriya Military Schools Entrance Examination
- JNV – Jawahar Navodaya Vidyalaya Selection Test
शामिल हैं।
विद्यार्थियों की तैयारी को बेहतर बनाने के लिए नियमित अभ्यास परीक्षाएं, व्यक्तिगत मार्गदर्शन, डाउट सॉल्विंग सेशन और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
संस्था केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान देती है। परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन के साथ विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और समय प्रबंधन जैसी क्षमताओं को विकसित करने का प्रयास किया जाता है।
पहले ही वर्ष में हासिल किया शानदार परिणाम
सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट की सबसे बड़ी उपलब्धियों में उसका पहले वर्ष का परिणाम शामिल है।
संस्था के अनुसार, संस्थान से मार्गदर्शन प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में से 30 विद्यार्थियों ने सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की, जबकि 1 विद्यार्थी का चयन राष्ट्रीय मिलिटरी स्कूल के लिए हुआ।
इसके अलावा 5 विद्यार्थियों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए भी हुआ।
ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए यह उपलब्धि विशेष रूप से प्रेरणादायक है। सीमित संसाधनों के बावजूद उचित मार्गदर्शन और मेहनत के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सफलता हासिल की जा सकती है, यह परिणाम इसका उदाहरण प्रस्तुत करता है।
इन परिणामों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच संस्थान के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है।
राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार से मिली विशेष पहचान
सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट की शैक्षणिक उपलब्धियों और ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए किए जा रहे कार्यों को राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान संस्था द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन और अनुशासित वातावरण उपलब्ध कराने के प्रयासों की एक महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
संस्था की स्थापना के शुरुआती दौर में ही विद्यार्थियों के उल्लेखनीय परिणाम और उसके शैक्षणिक कार्यों को मिली यह पहचान संस्थापक, शिक्षकों और पूरी टीम के लिए उत्साह बढ़ाने वाली उपलब्धि है।
30 सैनिक स्कूल चयन, 1 राष्ट्रीय मिलिटरी स्कूल चयन और 5 जवाहर नवोदय विद्यालय चयन जैसे परिणामों के साथ राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार संस्था की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ा है।
यह सम्मान संस्था को भविष्य में और अधिक ग्रामीण विद्यार्थियों तक पहुंचने तथा उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने की प्रेरणा देता है।
दूसरे वर्ष में पुणे तक विस्तार
पहले वर्ष की सफलता के बाद सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट ने अपने कार्य को और व्यापक बनाने का निर्णय लिया।
दूसरे वर्ष में पुणे जिले के डोणजे, सिंहगड में एक Residential Training Centre शुरू किया गया।
इस केंद्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, नियमित अध्ययन, अनुशासित दिनचर्या और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए केंद्रित तैयारी का अवसर उपलब्ध कराना है।
Residential Centre के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए एक व्यवस्थित वातावरण देने के साथ-साथ दैनिक दिनचर्या और अनुशासन पर भी ध्यान दिया जाता है।
इस विस्तार के साथ संस्था ने ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए अपने शैक्षणिक अवसरों का दायरा और बढ़ाया है।
बुलढाणा और पुणे केंद्रों में बढ़ रही विद्यार्थी संख्या
वर्तमान में दिए गए विवरण के अनुसार, बुलढाणा केंद्र में लगभग 125 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि पुणे के Residential Centre में लगभग 30 विद्यार्थी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
बढ़ती विद्यार्थी संख्या संस्था के प्रति विद्यार्थियों और अभिभावकों के विश्वास को दर्शाती है।
ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए व्यवस्थित तरीके से तैयार करने की संस्था की कार्यपद्धति ने इसे एक उभरते हुए शैक्षणिक केंद्र के रूप में पहचान दिलाई है।
संस्था का प्रयास है कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षा तक सीमित तैयारी न देकर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार किया जाए।
पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व विकास पर जोर
सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट में विद्यार्थियों की तैयारी केवल पुस्तकीय शिक्षा तक सीमित नहीं है।
संस्था में व्यक्तित्व विकास, शारीरिक फिटनेस, समय प्रबंधन और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मानसिक तैयारी पर भी ध्यान दिया जाता है।
विशेष रूप से मराठी माध्यम से आने वाले ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए कठिन विषयों को सरल भाषा में समझाने की प्रभावी पद्धति विकसित की गई है।
इससे विद्यार्थियों को विषयों को समझने के साथ-साथ परीक्षा के लिए आत्मविश्वास विकसित करने में भी मदद मिलती है।
संस्था का मानना है कि किसी भी विद्यार्थी की सफलता के लिए केवल किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उसके भीतर अनुशासन, नियमितता, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण भी आवश्यक है।
टीमवर्क बना सफलता का आधार
संस्था की सफलता के पीछे संस्थापक श्री चैतन्य सुरेश कासार की दूरदृष्टि के साथ-साथ ओंकार सर के शैक्षणिक नियोजन और कासार मैडम के विद्यार्थियों के प्रति समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है।
इन सभी के संयुक्त प्रयासों से सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट आज अनेक विद्यार्थियों के लिए सफलता की दिशा में मार्गदर्शन देने वाला केंद्र बन रहा है।
शिक्षकों की टीम विद्यार्थियों की कमजोरियों को समझकर उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास करती है। नियमित अभ्यास, मार्गदर्शन और विद्यार्थियों के साथ व्यक्तिगत संवाद को भी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
संस्था का कार्य केवल कोचिंग तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें हासिल करने के लिए आवश्यक अनुशासन, आत्मविश्वास और मेहनत की दिशा दिखाना भी है।
ग्रामीण विद्यार्थियों के सपनों को मिल रही नई दिशा
सैनिक स्कूल, राष्ट्रीय मिलिटरी स्कूल और जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रवेश हासिल करना देश के अनेक ग्रामीण विद्यार्थियों का सपना होता है।
इन संस्थानों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना आवश्यक होता है। ऐसे में सही समय पर सही मार्गदर्शन विद्यार्थियों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ग्रामीण क्षेत्र के कई विद्यार्थी प्रतिभाशाली होने के बावजूद उचित मार्गदर्शन और तैयारी के अवसरों की कमी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में पीछे रह जाते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को व्यवस्थित तैयारी उपलब्ध कराना सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
संस्था इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ अनुशासन और आत्मविश्वास का वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है।
छोटे प्रयास से दो केंद्रों तक का सफर
2 मई 2025 को बुलढाणा जिले से शुरू हुआ यह शैक्षणिक प्रयास अब बुलढाणा और पुणे के दो केंद्रों तक पहुंच चुका है।
एक वर्ष के भीतर हासिल किए गए परिणाम, बढ़ती विद्यार्थी संख्या और राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार जैसी उपलब्धियां संस्था की यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
जहां पहले वर्ष में संस्था ने ग्रामीण विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया, वहीं दूसरे वर्ष में पुणे के डोणजे-सिंहगड क्षेत्र में Residential Training Centre की शुरुआत कर संस्था ने अपने कार्य का विस्तार किया है।
भविष्य में और विद्यार्थियों तक पहुंचने का लक्ष्य
सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट आने वाले समय में अपने शैक्षणिक कार्य को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखता है।
संस्था का प्रयास है कि ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले अधिक से अधिक विद्यार्थियों को सैनिक स्कूल, राष्ट्रीय मिलिटरी स्कूल और जवाहर नवोदय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रवेश परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण तैयारी उपलब्ध कराई जा सके।
शिक्षा के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास और राष्ट्रसेवा की भावना को केंद्र में रखते हुए संस्था विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट ग्रामीण विद्यार्थियों को सैनिक स्कूल, राष्ट्रीय मिलिटरी स्कूल और जवाहर नवोदय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयार करने का कार्य कर रहा है।
श्री चैतन्य सुरेश कासार द्वारा 2 मई 2025 को शुरू की गई संस्था ने अपने पहले वर्ष में 30 सैनिक स्कूल चयन, 1 राष्ट्रीय मिलिटरी स्कूल चयन और 5 जवाहर नवोदय विद्यालय चयन का उल्लेखनीय परिणाम दर्ज किया।
संस्था के शैक्षणिक कार्य और ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
वर्तमान में बुलढाणा और पुणे के दो केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अनुशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा के साथ सैनिकी स्कॉलर इंस्टीट्यूट ग्रामीण विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने का प्रयास कर रहा है।
छोटे से प्रयास से शुरू हुई यह यात्रा अब दो केंद्रों तक पहुंच चुकी है और आने वाले समय में अधिक से अधिक ग्रामीण विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखती है।









