• Create News
  • ▶ Play Radio
  • “IPO मार्केट में बंपर धमाका! 30 सितंबर तक ₹45,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में 34 कंपनियां”

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    भारतीय शेयर बाजार के प्राइमरी मार्केट में आने वाले दिनों में IPO की बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। करीब 34 कंपनियां 30 सितंबर 2026 की डेडलाइन से पहले अपना IPO लॉन्च करने की तैयारी में हैं। इन कंपनियों के पब्लिक इश्यू के जरिए बाजार से करीब ₹45,000 करोड़ जुटाने की योजना बताई जा रही है।

    30 सितंबर की डेडलाइन नजदीक आने के साथ कंपनियों और निवेश बैंकरों के बीच IPO लॉन्च को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। कंपनियां जल्द से जल्द अपने इश्यू बाजार में लाना चाहती हैं, ताकि उन्हें दोबारा वित्तीय आंकड़े अपडेट करने की प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।

    30 सितंबर की डेडलाइन क्यों है अहम?

    कंपनियों के IPO से जुड़ी यह तेजी मुख्य रूप से उनके DRHP (Draft Red Herring Prospectus) में इस्तेमाल किए गए वित्तीय आंकड़ों की वैधता से जुड़ी है।

    दी गई जानकारी के मुताबिक, कंपनियों द्वारा DRHP में जमा किए गए मार्च तिमाही के ऑडिटेड वित्तीय आंकड़ों की वैधता 30 सितंबर तक रहती है। इसके बाद कंपनियों को नए वित्तीय आंकड़ों के साथ प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ सकती है।

    यही वजह है कि कई कंपनियां सितंबर के अंत से पहले IPO लॉन्च करने की कोशिश कर रही हैं।

    34 कंपनियां IPO की कतार में

    प्राइम डेटाबेस के अनुसार, क्रेडीला फाइनेंशियल सर्विसेज, डॉर्फ-केटल केमिकल्स इंडिया, कंटिन्यूम ग्रीन एनर्जी, वेरिटास फाइनेंस, प्रेस्टीज हॉस्पिटैलिटी वेंचर और इनोवेटिवव्यू इंडिया जैसी कंपनियों के DRHP की मंजूरी 30 सितंबर तक खत्म होने वाली है।

    इसके अलावा करमतारा इंजीनियरिंग, इमेजिन मार्केटिंग, मौरी टेक, रवि इंफ्राबिल्ड प्रोजेक्ट्स, ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज, रुनवाल एंटरप्राइजेज, RITE वॉटर सॉल्यूशंस, LCC प्रोजेक्ट्स, प्रोजील ग्रीन एनर्जी और A वन स्टील्स इंडिया समेत कई अन्य कंपनियां भी समय सीमा से पहले IPO लॉन्च करने पर विचार कर रही हैं।

    कंपनियां क्यों जल्दी ला रही हैं IPO?

    नया DRHP दाखिल करना कंपनियों के लिए आसान या सस्ता विकल्प नहीं माना जाता। इसमें नए ऑडिटेड वित्तीय विवरण, कानूनी जांच, सेबी की समीक्षा और अन्य प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।

    मार्केट एक्सपर्ट दीपक जसानी के अनुसार, दोबारा फाइलिंग की प्रक्रिया में करीब ₹3 से ₹5 करोड़ तक का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। इसके अलावा सेबी की फाइलिंग फीस और नई कानूनी प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है।

    इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 60 से 90 दिन तक का अतिरिक्त समय लग सकता है।

    IPO बाजार में पहले से तेजी

    2026 में भारतीय IPO मार्केट पहले ही काफी सक्रिय रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में 12 IPO के जरिए करीब ₹28,649 करोड़ जुटाए गए।

    अगस्त में अब तक 8 IPO लॉन्च हुए हैं, जिनसे करीब ₹10,636 करोड़ जुटाए गए हैं।

    वहीं, 2026 के पहले सात महीनों में 39 IPO के जरिए करीब ₹51,000 करोड़ जुटाए जा चुके हैं।

    निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?

    इतनी बड़ी संख्या में IPO आने से रिटेल और संस्थागत निवेशकों के सामने निवेश के कई नए विकल्प खुल सकते हैं। हालांकि, IPO की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर इश्यू निवेश के लिए बेहतर अवसर होगा।

    कंपनियों का बिजनेस मॉडल, वैल्यूएशन, कर्ज, मुनाफा, ग्रोथ की संभावनाएं और IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल जैसे पहलुओं को समझना जरूरी होगा।

    बाजार की परिस्थितियां और इश्यू का मूल्यांकन भी IPO की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    कुछ कंपनियां टाल सकती हैं IPO

    डेडलाइन के दबाव के बावजूद सभी कंपनियां अपना IPO सितंबर तक लाएंगी, यह तय नहीं है।

    प्राइम डेटाबेस के अनुसार, कुछ कंपनियों ने बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए वैल्यूएशन कम किया है, इश्यू साइज घटाया है या IPO लॉन्च को टालने का फैसला किया है।

    इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की ओर से वैल्यूएशन को लेकर उठाई गई आपत्तियां भी कुछ कंपनियों के लिए चुनौती बन रही हैं।

    आगे भी जारी रहेगा IPO का सिलसिला

    30 सितंबर की डेडलाइन के करीब पहुंच चुके 34 IPO के अलावा भी बड़ी संख्या में कंपनियां बाजार में उतरने की तैयारी कर रही हैं।

    प्राइम डेटाबेस के मुताबिक, सेबी की मंजूरी प्राप्त 133 अन्य कंपनियां जुलाई 2027 के अंत तक IPO के जरिए कुल ₹2.22 लाख करोड़ से अधिक जुटाने की योजना बना रही हैं।

    इससे साफ है कि भारतीय प्राइमरी मार्केट में IPO की गतिविधियां आने वाले महीनों में भी जारी रहने की संभावना है।

    कीमत और सही समय पर निर्भर करेगा फैसला

    बैंकरों और कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती IPO लॉन्च करने के सही समय और सही वैल्यूएशन के बीच संतुलन बनाने की है।

    अगर किसी कंपनी को लगता है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में उसे उचित वैल्यूएशन नहीं मिलेगा, तो वह IPO को आगे बढ़ाने के बजाय बेहतर बाजार परिस्थितियों का इंतजार कर सकती है।

    वहीं, जिन कंपनियों के DRHP की वैधता 30 सितंबर को समाप्त हो रही है, उनके लिए समय सीमा से पहले IPO लॉन्च करना अतिरिक्त वित्तीय और नियामकीय प्रक्रियाओं से बचने का महत्वपूर्ण अवसर है।

    भारतीय IPO मार्केट में सितंबर के अंत तक बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। करीब 34 कंपनियां 30 सितंबर 2026 की डेडलाइन से पहले IPO लाकर लगभग ₹45,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं। DRHP में इस्तेमाल वित्तीय आंकड़ों की वैधता समाप्त होने से पहले कंपनियां इश्यू लॉन्च करना चाहती हैं। हालांकि, बाजार की स्थिति और वैल्यूएशन को देखते हुए कुछ कंपनियां अपना IPO टाल भी सकती हैं। वहीं, सेबी की मंजूरी प्राप्त 133 अन्य कंपनियां भी आने वाले समय में IPO के जरिए ₹2.22 लाख करोड़ से अधिक जुटाने की योजना बना रही हैं।

  • Related Posts

    RAJVIMAL ENGINEERING WORKS – शिक्षा, रोबोटिक्स और इंजीनियरिंग उपकरणों के क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार का अग्रणी नाम

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। तकनीकी शिक्षा, रोबोटिक्स और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में स्वदेशी समाधान विकसित करने की दिशा में Mr. Santosh Gaikwad ने अपनी…

    Continue reading
    “मलेशियाई राजकुमारी ने ब्रिटिश रेसिंग ड्राइवर से की शादी, कुआलालंपुर में शाही अंदाज में हुआ भव्य विवाह”

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। मलेशिया के शाही परिवार में एक भव्य विवाह समारोह ने दुनियाभर का ध्यान आकर्षित किया है। मलेशियाई राजकुमारी तेंगकु पुत्री…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *