




ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने जिस पिनाका रॉकेट से पाकिस्तान में तबाही मचाई, अब वही हथियार सऊदी अरब, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों के फौजी जखीरे में शामिल होने जा रहा है।
ऑपेऱशन सिंदूर: भारत के स्वदेशी रक्षा उपकरणों की ताकत अब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत द्वारा विकसित गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। सऊदी अरब, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों ने इस सिस्टम को खरीदने में रुचि दिखाई है।
यह जानकारी सोलर इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक (रिटायर्ड) मेजर जनरल वी. आर्य ने दी है। उन्होंने बताया कि इन देशों ने पिनाका रॉकेट के गाइडेड वर्जन को लेकर गहरी दिलचस्पी जताई है, जो भारत के रक्षा निर्माण क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है।
ऑपरेशन सिंदूर में पिनाका ने दिखाई थी ताकत
हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर पिनाका रॉकेट से हमला किया था। इस ऑपरेशन ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत के पास अब ऐसी तकनीक है जो दुश्मन के इलाकों में सटीक और त्वरित हमला करने की क्षमता रखती है।
क्या है पिनाका रॉकेट सिस्टम की खासियत?
१. मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर (MBRL): एक बार में 12 रॉकेट दागने में सक्षम
२. गाइडेड पिनाका: सैटेलाइट-निर्देशित रॉकेट जो 75 किमी से ज्यादा की दूरी तक सटीक हमला कर सकता है
३. एक बैटरी: कुछ सेकंड में 1 टन से ज्यादा विस्फोटक गिराने की क्षमता
४. विकासकर्ता: DRDO और सोलर इंडस्ट्रीज द्वारा संयुक्त रूप से विकसित
५. ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता: भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता का बड़ा उदाहरण
किन देशों ने दिखाई रुचि?
सऊदी अरब, वियतनाम और इंडोनेशिया के अलावा इससे पहले आर्मीनिया भी पिनाका रॉकेट सिस्टम खरीद चुका है। आर्मीनिया ने इसे अज़रबैजान के खिलाफ संघर्ष में इस्तेमाल किया था, जिससे इसकी वैश्विक विश्वसनीयता और बढ़ गई है।
कितनी है कीमत?
सिस्टम का हिस्सा अनुमानित कीमत
गाइडेड पिनाका रॉकेट (प्रति पीस) $56,000 (करीब ₹4.6 करोड़)
एक यूनिट (लॉन्चर+फायर कंट्रोल+कमांड पोस्ट) ₹140 से ₹150 करोड़
पूरी रेजीमेंट (6 लॉन्चर+सपोर्ट सिस्टम) करीब ₹850 करोड़
भारत का पिनाका रॉकेट सिस्टम अमेरिका के HIMARS सिस्टम की तुलना में तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ-साथ किफायती भी है।
रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता
पिनाका रॉकेट सिस्टम को भारत के मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। यह भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर रहा है। आज भारत अपनी रक्षा तकनीक से केवल अपनी सीमाओं को ही नहीं बल्कि दुनिया भर के कई देशों को भी सशक्त बना रहा है।
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