




अश्विनी नितिन कापडणी ने सरकारी नौकरी छोड़कर शुरू किया व्हिजुअल फर्निचर, आज पैन इंडिया में कर रही हैं कारोबार।

Success Story: महाराष्ट्र के नासिक से शुरू हुई व्हिजुअल फर्निचर की कहानी सिर्फ एक व्यवसायिक सफलता नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल है। इस कंपनी की संस्थापक अश्विनी नितिन कापडणी ने साल 2004 में महज ₹50,000 की पूंजी से इसकी शुरुआत की थी और आज उनकी कंपनी पूरे भारत में फर्निचर सप्लाई कर रही है।
इंजीनियर से उद्यमी तक का सफर
अश्विनी कापडणी 2000 से 2004 तक हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थीं। लेकिन उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर खुद का व्यवसाय शुरू करने का साहसिक निर्णय लिया। उनका उद्देश्य था कि लोगों को सस्ते, टिकाऊ और कस्टमाइज्ड फर्निचर उपलब्ध कराया जाए, साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किए जाएं।
स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर तक का विस्तार
व्हिजुअल फर्निचर की शुरुआत नासिक जिले में छोटे स्तर पर हुई थी। शुरुआती दिनों में उन्होंने घरेलू फर्निचर से लेकर स्कूल, कॉलेज और औद्योगिक संस्थानों के लिए फर्नीचर बनाना शुरू किया।
आज उनकी कंपनी का कारोबार नासिक से लेकर मुंबई, पुणे, गोवा, दिल्ली, बेंगलुरु और भारत के अन्य हिस्सों तक फैल चुका है।
व्हिजुअल फर्निचर आज निम्नलिखित क्षेत्रों में सेवाएं दे रही है:
१. घरेलू क्षेत्र: कस्टमाइज्ड होम फर्नीचर
२. शैक्षणिक संस्थान: स्कूल- कॉलेज के लिए बेंच, डेस्क और क्लासरूम सेटअप
३. औद्योगिक क्षेत्र: फैक्ट्री और ऑफिस के लिए फर्नीचर
४. सरकारी विभाग: टेंडर के तहत फर्निचर आपूर्ति और विशेष ऑर्डर
सामाजिक प्रभाव और रोजगार सृजन
व्हिजुअल फर्निचर की सफलता केवल आर्थिक नहीं है, इसका सामाजिक प्रभाव भी उल्लेखनीय है:
१. 1 कर्मचारी से शुरू होकर आज यह कंपनी कई लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रही है।
२. ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कारीगरों और श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही है।
३. युवाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें फर्नीचर उद्योग में नई पहचान दिला रही है।
नेतृत्व और उद्देश्य से भरा सफर
अश्विनी कापडणी का मानना है कि कोई भी व्यवसाय केवल मुनाफे के लिए नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए होना चाहिए।
उनकी कंपनी का टैगलाइन भी उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है:
“BE HAPPY AND LIVE LONG LIFE”
व्हिजुअल फर्निचर सिर्फ लकड़ी और खिल का मेल नहीं है, यह नेतृत्व, साहस और सामाजिक परिवर्तन की कहानी है।
अश्विनी कापडणी ने यह साबित कर दिया कि अगर सोच सही हो और मेहनत ईमानदार हो तो छोटे शहर से शुरू होकर भी कोई भी व्यवसाय देशभर में अपनी पहचान बना सकता है।
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