




शिमला – हिमाचल प्रदेश में युवाओं को नशे की लत से बचाने और कर्तव्यनिष्ठ पदों पर ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति रोकने के उद्देश्य से सुक्खू सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश में पुलिस विभाग में भर्ती से पहले सभी उम्मीदवारों का डोप टेस्ट अनिवार्य किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपना रही है। यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि ऐसे युवा, जो नशे की लत से प्रभावित हैं, संवेदनशील और जिम्मेदार पदों पर न आ जाएं।
📌 पहले चरण में पुलिस भर्ती पर लागू होगा डोप टेस्ट
राज्य सरकार ने NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई तेज करते हुए यह फैसला लिया है कि पहले चरण में हिमाचल पुलिस भर्ती के दौरान उम्मीदवारों का डोप टेस्ट अनिवार्य होगा। बाद में इस नीति को अन्य सरकारी विभागों में भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि नशे के कारोबार से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है और आम जनता से अपील की है कि वे इस मुहिम में भागीदार बनें।
📣 राज्यपाल की टिप्पणी और मुख्यमंत्री का जवाब
हाल ही में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने राज्य सरकार पर नशे के खिलाफ कार्रवाई में गंभीरता न बरतने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रदेश में केवल एक ही रेड क्रॉस नशा मुक्ति केंद्र (कुल्लू) है।
सीएम सुक्खू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस प्रकार की टिप्पणी शोभा नहीं देती। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में प्रदेश में नशा निवारण केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी और नशे के खिलाफ रणनीतिक कार्रवाई जारी रहेगी।