




EV मोटर्स से लेकर डिफेंस सिस्टम तक जरूरी Rare Earth Magnet के लिए भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने जा रही महिंद्रा और यूनो मिंडा, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम।
भारत में महिंद्रा और यूनो मिंडा बनाएंगे Rare Earth Magnet, चीन पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी। भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। देश की प्रमुख ऑटो कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा और ऑटो कंपोनेंट निर्माता यूनो मिंडा भारत में ही Rare Earth Magnet (रेयर अर्थ मैग्नेट) का निर्माण शुरू करने जा रहे हैं।
क्यों जरूरी हैं Rare Earth Magnet?
Rare Earth Magnet आधुनिक टेक्नोलॉजी का अहम हिस्सा हैं। इनका उपयोग:
१. इलेक्ट्रिक व्हीकल की मोटर्स,
२. स्मार्टफोन,
३. कंप्यूटर,
४. MRI मशीन,
५. डिफेंस सिस्टम आदि में होता है।
अभी तक भारत इनकी आपूर्ति के लिए 90% चीन पर निर्भर था। अप्रैल 2025 में चीन द्वारा इन मैग्नेट्स के निर्यात पर रोक लगाने से दुनिया भर में सप्लाई चेन में संकट खड़ा हो गया था। अमेरिका और यूरोप को तो सप्लाई मिलनी शुरू हो गई, लेकिन भारत अभी भी वेटिंग लिस्ट में है।
महिंद्रा और यूनो मिंडा की साझेदारी
१. महिंद्रा ने भारी उद्योग मंत्रालय के साथ बैठक में भारत में Rare Earth Magnet के लोकल मैन्युफैक्चरिंग का प्रस्ताव रखा है।
२. कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए स्थायी सप्लाई सुनिश्चित करना चाहती है।
३. महिंद्रा अब तक दो नई इलेक्ट्रिक SUV लॉन्च कर चुकी है और भविष्य में भी EV सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।
४. यूनो मिंडा भी इस क्षेत्र में निवेश कर भारत को चीन की सप्लाई चेन पर निर्भर होने से बचाना चाहती है।
भारत में आत्मनिर्भर बनने की योजना
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत में Rare Earth Magnet के पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने में 1-2 साल का समय लग सकता है।
सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है और कंपनियों को सब्सिडी व इंसेंटिव देने के लिए नई योजनाएं बना रही है ताकि घरेलू उत्पादन जल्द से जल्द शुरू हो सके।
EV और डिफेंस सेक्टर के लिए गेम चेंजर
१. अगर भारत में Rare Earth Magnet का निर्माण शुरू हो जाता है, तो इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर और डिफेंस इंडस्ट्री को बहुत फायदा होगा।
२. EV इंडस्ट्री को स्थायी और सस्ती सप्लाई मिलेगी।
३. डिफेंस सिस्टम में भी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
४. चीन से निर्भरता कम होने से भारत की सप्लाई चेन मजबूत होगी।
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