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  • लेंसकार्ट आईपीओ : ग्रे मार्केट में धमाकेदार एंट्री, प्राइस बैंड से लेकर लिस्टिंग तक जानें पूरी डिटेल

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    भारत की सबसे बड़ी आईवियर रिटेल कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है कंपनी का बहुप्रतीक्षित आईपीओ (Initial Public Offering), जिसकी ग्रे मार्केट में धमाकेदार एंट्री हुई है। सोमवार को लेंसकार्ट के आईपीओ ने अनऑफिशियल मार्केट में ऐसा प्रदर्शन किया कि निवेशकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। यह आईपीओ इसी हफ्ते खुलने जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले हफ्ते इसकी लिस्टिंग स्टॉक मार्केट में हो सकती है।

    लेंसकार्ट ने अपने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹382 से ₹402 प्रति शेयर तय किया है। कंपनी के मुताबिक, यह इश्यू 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक निवेशकों के लिए खुला रहेगा। कंपनी का लक्ष्य इस इश्यू के जरिए करीब ₹2,150 करोड़ रुपये जुटाने का है। इसमें एक बड़ा हिस्सा फ्रेश इश्यू के रूप में होगा, जिससे कंपनी अपने विस्तार, तकनीकी निवेश और अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं को गति दे सकेगी।

    ग्रे मार्केट में लेंसकार्ट के शेयरों का GMP (Grey Market Premium) 65 से 70 रुपये तक बताया जा रहा है। यानी अगर यह ट्रेंड बरकरार रहा, तो लिस्टिंग के दिन शेयरों की कीमतें प्राइस बैंड से काफी ऊपर खुल सकती हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लेंसकार्ट का आईपीओ लंबे समय बाद किसी उपभोक्ता ब्रांड का इतना मजबूत डेब्यू साबित हो सकता है।

    लेंसकार्ट की कहानी एक प्रेरणादायक स्टार्टअप जर्नी की मिसाल है। साल 2010 में पियूष बंसल (Peyush Bansal) ने कंपनी की नींव रखी थी। तब इसका उद्देश्य था लोगों को स्टाइलिश, सस्ते और क्वालिटी आईवियर उपलब्ध कराना। ऑनलाइन बिक्री के साथ शुरुआत करने वाली कंपनी ने अब भारत के लगभग हर बड़े शहर में अपना ऑफलाइन नेटवर्क खड़ा कर लिया है। आज लेंसकार्ट के देशभर में करीब 2,000 से अधिक स्टोर हैं, जबकि कंपनी ने सिंगापुर, दुबई और लंदन जैसे बाजारों में भी अपने पांव पसारे हैं।

    लेंसकार्ट का बिजनेस मॉडल डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सेलिंग तक की पूरी प्रक्रिया कंपनी खुद नियंत्रित करती है। इसका फायदा यह हुआ कि कंपनी क्वालिटी बनाए रखते हुए लागत घटाने में कामयाब रही। यही वजह है कि लेंसकार्ट ने कम समय में बाजार में मजबूत पकड़ बनाई।

    वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का राजस्व करीब ₹6,400 करोड़ के पार पहुंच चुका है। वहीं, इसके ग्राहकों की संख्या करोड़ों में है। कंपनी के निवेशकों में सॉफ्टबैंक, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, केडारा कैपिटल और रतन टाटा जैसे नाम शामिल हैं, जो इस आईपीओ को लेकर उत्साहित हैं।

    जानकारों का कहना है कि लेंसकार्ट का आईपीओ उन निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर हो सकता है जो भारत के बढ़ते उपभोक्ता ब्रांड्स में निवेश करना चाहते हैं। आईवियर बाजार की मांग हर साल 12-15% की दर से बढ़ रही है, और डिजिटल ट्रेंड के कारण ऑनलाइन बिक्री का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है।

    कंपनी आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से अपने फैक्ट्री आउटलेट्स और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में करेगी। इसके अलावा कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी उपस्थिति बढ़ाने की योजना बना रही है। खास बात यह है कि लेंसकार्ट पहले से ही प्रॉफिटेबल स्टेज में पहुंच चुकी है, जो इसे अन्य स्टार्टअप आईपीओ से अलग बनाता है।

    हालांकि, बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल शुरुआती रुझान का संकेत देता है, यह किसी भी लिस्टिंग की सफलता की गारंटी नहीं होता। कंपनी को बढ़ती प्रतिस्पर्धा, अंतरराष्ट्रीय विस्तार की लागत और आयातित कच्चे माल की निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

    फिर भी, निवेशकों के बीच जोश इस बात का सबूत है कि भारत में उपभोक्ता-केंद्रित ब्रांड्स अब निवेशकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। आईपीओ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लेंसकार्ट की लिस्टिंग 10 नवंबर 2025 को हो सकती है, और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे “सबसे चर्चित आईपीओ” कहा जा सकता है।

    अगर आप इस आईपीओ में निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो ध्यान रखें कि न्यूनतम लॉट साइज 37 शेयरों का है और इसके लिए लगभग ₹14,874 का निवेश करना होगा। खुदरा निवेशकों के लिए यह एक संतुलित एंट्री पॉइंट माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर, लेंसकार्ट का आईपीओ न सिर्फ एक निवेश अवसर है, बल्कि यह भारत के उपभोक्ता ब्रांड्स की ताकत का प्रतीक भी है। जिस तरह ग्रे मार्केट में इसने दमदार एंट्री की है, उससे साफ है कि निवेशकों को कंपनी के भविष्य पर भरोसा है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या लिस्टिंग के दिन यह आईपीओ उम्मीदों पर खरा उतरता है या नहीं।

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