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  • “श्रावण समापन पर त्र्यंबकेश्वर में भक्तों का सैलाब – गूँजा हर-हर महादेव”

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    70 हज़ार से अधिक भक्त पहुंचे, 50 हज़ार ने की ब्रह्मगिरी पर्वत परिक्रमा, भारी सुरक्षा व्यवस्था

    श्रावण मास का अंतिम सोमवार धार्मिक आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य लेकर आया। भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र त्र्यंबकेश्वर मंदिर में कल लगभग 70 हज़ार से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। इनमें से करीब 50 हज़ार भक्तों ने पौराणिक महत्त्व रखने वाले ब्रह्मगिरी पर्वत की परिक्रमा कर अपनी भक्ति का प्रदर्शन किया। मंदिर परिसर और आसपास का इलाका “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंजता रहा और पूरा क्षेत्र शिवभक्ति में सराबोर दिखाई दिया।

    आस्था और परंपरा का संगम

    श्रावण माह हिंदू पंचांग में भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। खासतौर पर श्रावण सोमवार का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
    त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि यह वही स्थल है जहां से गोदावरी नदी का उद्गम माना जाता है। श्रद्धालु यहां आकर केवल शिवलिंग का पूजन ही नहीं करते, बल्कि ब्रह्मगिरी पर्वत की परिक्रमा कर पुण्य अर्जित करते हैं।

    कई श्रद्धालु दूर-दराज से पैदल यात्रा कर भगवान के दरबार पहुंचे।

    • एक भक्त परिवार गुजरात के भरुच से लगभग 300 किलोमीटर पैदल चलकर त्र्यंबकेश्वर पहुंचा।

    • कई कांवड़िए पास की गोदावरी नदी से जल लाकर भगवान शिव को अर्पित करते दिखाई दिए।

    • महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में बेलपत्र और दूध लेकर मंदिर में पहुंचीं।

    श्रद्धालुओं ने कहा कि कठिनाइयों के बावजूद शिवदर्शन और परिक्रमा से उन्हें अलौकिक शांति का अनुभव हुआ।

    भक्तों की भारी भीड़ – देर रात तक जारी रहे दर्शन

    सुबह से ही मंदिर के द्वार भक्तों के लिए खोल दिए गए थे। महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के साथ-साथ गुजरात, मध्यप्रदेश और उत्तर भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
    दोपहर तक मंदिर परिसर में लंबी कतारें लग गईं और प्रशासन को अतिरिक्त इंतज़ाम करने पड़े। अनुमान के मुताबिक, दिनभर में 70 हज़ार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान त्र्यंबकेश्वर के दर्शन किए।
    मंदिर के पुजारियों के अनुसार, अंतिम श्रावण सोमवार होने के कारण भीड़ सामान्य दिनों से कहीं अधिक रही। भक्त देर रात तक दर्शन करते रहे।

    सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था

    भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा।

    • 300 पुलिसकर्मी और 500 होमगार्ड्स की विशेष तैनाती की गई।

    • भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग, CCTV कैमरे और पैदल गश्त की व्यवस्था की गई।

    • महिला श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।

    • यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए नाशिक-त्र्यंबकेश्वर मार्ग पर कई जगह अस्थायी पार्किंग बनाई गई और वाहनों को चरणबद्ध तरीके से प्रवेश दिया गया।

    नाशिक ग्रामीण पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, पूरा कार्यक्रम शांति और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ और किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

    आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

    श्रावण सोमवार पर लाखों भक्तों के आगमन का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी देखा गया।

    • मंदिर के आसपास के फूल, पूजन सामग्री, प्रसाद और बेलपत्र विक्रेताओं की अच्छी कमाई हुई।

    • होटल, धर्मशालाएं और लॉज श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे।

    • ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को भी अतिरिक्त आय हुई।

    स्थानीय व्यापारी संघ के अनुसार, इस श्रावण माह में त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में करोड़ों रुपये का कारोबार हुआ है।

    आगामी कुंभ मेले की तैयारी में प्रशासन सतर्क

    2027 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेला की दृष्टि से भी प्रशासन ने इस श्रावण सोमवार को “ट्रायल रन” की तरह माना। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतज़ाम और यातायात नियंत्रण की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने रिपोर्ट तैयार की है।
    नाशिक जिला प्रशासन का मानना है कि आने वाले कुंभ मेले में करोड़ों श्रद्धालु आएंगे, इसलिए अभी से व्यवस्थाओं को परखना आवश्यक है।

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