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    भारत-सऊदी अरब की सातवीं संयुक्त रक्षा समिति बैठक दिल्ली में

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    भारत और सऊदी अरब के बीच रक्षा और सामरिक सहयोग का महत्व पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ता रहा है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध केवल आर्थिक और व्यापारिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा, सामरिक साझेदारी और रक्षा उत्पादन में भी सहयोग को महत्व दिया गया है। इसी दिशा में 28 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में भारत-सऊदी अरब संयुक्त रक्षा समिति (JCDC) की सातवीं बैठक आयोजित की गई।

    बैठक का उद्देश्य और प्रमुख बिंदु

    बैठक में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर गहन चर्चा हुई। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

    1. सैन्य प्रशिक्षण सहयोग

    भारत ने सऊदी सशस्त्र बलों को प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव रखा। इसमें दोनों देशों की सेनाओं के बीच आम प्रशिक्षण कार्यक्रम, सैन्य तकनीकी कार्यशालाएं, और कॉमन डिफेंस ट्रेनिंग मिशन शामिल हैं। यह कदम दोनों देशों की सेनाओं के बीच रणनीतिक तालमेल को मजबूत करेगा।

    2. साइबर और सूचना प्रौद्योगिकी

    साइबर सुरक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा हुई। वर्तमान डिजिटल युग में साइबर हमले और सूचना सुरक्षा एक बड़ी चुनौती हैं। दोनों देशों ने साझा साइबर सुरक्षा अभ्यास, डेटा सुरक्षा और इन्फॉर्मेशन शेरिंग प्रोटोकॉल पर विचार किया। इससे दोनों देशों को न केवल अपनी सुरक्षा प्रणाली मजबूत करने में मदद मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय साइबर सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।

    3. आपदा प्रबंधन

    आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में संयुक्त प्रयासों पर बल दिया गया। प्राकृतिक आपदाओं, समुद्री आपदाओं और औद्योगिक दुर्घटनाओं के मामले में संयुक्त अभ्यास और राहत मिशन संचालन दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

    4. संचार और सामरिक सहयोग

    बैठक में संचार प्रणालियों, स्ट्रैटेजिक कमांड नेटवर्क, और सामरिक योजना साझा करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। यह कदम भविष्य में युद्ध और संकट के समय दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा।

    संयुक्त निर्माण और औद्योगिक साझेदारी

    बैठक में संयुक्त रक्षा उपकरणों के निर्माण और औद्योगिक साझेदारी के अवसरों पर विशेष जोर दिया गया। भारत ने इस अवसर पर “मेड इन इंडिया” उन्नत रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन किया, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया कि भारत सऊदी अरब के साथ संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी साझेदारी के लिए तैयार है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल दोनों देशों की रक्षा उत्पादकता को बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्रीय औद्योगिक विकास और रक्षा निर्यात के लिए भी नई संभावनाएं खोलेगी।

    समुद्री सुरक्षा और सैन्य अभ्यास

    समुद्री सुरक्षा दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में समुद्री सुरक्षा अभ्यास, थलसेना और नौसेना के स्टाफ वार्ता, और साझा सैन्य अभ्यासों की योजना पर चर्चा हुई। इससे दोनों देशों की सेनाओं को वास्तविक परिस्थितियों में तालमेल और सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

    दोनों देशों ने यह भी सहमति व्यक्त की कि भविष्य में नौसेना और थलसेना के बीच वार्ताएं और संयुक्त अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। इससे क्षेत्रीय जलमार्गों की सुरक्षा और समुद्री आपराधिक गतिविधियों से निपटने की क्षमता में वृद्धि होगी।

    रणनीतिक साझेदारी परिषद और मंत्रीस्तरीय समिति

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्रैल 2025 में सऊदी अरब यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी परिषद के तहत एक मंत्रीस्तरीय रक्षा सहयोग समिति की स्थापना की गई थी।

    इस समिति का उद्देश्य था कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाए, ताकि निर्णय प्रक्रिया तेज हो और द्विपक्षीय सहयोग में निरंतरता बनी रहे। JCDC की यह बैठक इसी रणनीति का हिस्सा है, जिससे दोनों देशों के रक्षा संबंध और अधिक मजबूत और व्यवस्थित बने।

    क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक महत्व

    भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ता हुआ रक्षा सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बैठक में दोनों पक्षों ने आतंकवाद, साइबर हमलों, समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और अन्य अस्थिरताओं के खिलाफ सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए भी सहायक होगा।

    निष्कर्ष और भविष्य की संभावनाएं

    सातवीं JCDC बैठक ने स्पष्ट कर दिया कि भारत और सऊदी अरब अपने रक्षा और सामरिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाना चाहते हैं। बैठक के दौरान उठाए गए कदम और प्रस्तावित परियोजनाएं दोनों देशों के लिए रणनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

    • संयुक्त निर्माण और औद्योगिक साझेदारी से रक्षा उत्पादन बढ़ेगा।

    • प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यास से दोनों सेनाओं का तालमेल मजबूत होगा।

    • साइबर और सूचना प्रौद्योगिकी सहयोग से डिजिटल सुरक्षा में सुधार होगा।

    • आपदा प्रबंधन और सामरिक सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देगा।

    विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस सहयोग के और ठोस परिणाम सामने आएंगे। यह न केवल भारत-सऊदी अरब संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को भी प्रभावित करेगा।

    संक्षेप में, सातवीं JCDC बैठक ने रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दी है और दोनों देशों के बीच विश्वसनीय और दीर्घकालिक रक्षा सहयोग की नींव मजबूत की है।

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