




भारत में IndiGo—देश की सबसे बड़ी एयरलाइन—ने Turkish Airlines से दो बड़े Boeing 777-300ER विमान ‘wet lease’ के आधार पर हासिल किए हैं। इसमें Turkish Airlines केवल विमान, मैंटेनेंस और इन्श्योरेंस प्रदान करती है, जबकि कॅबिन क्रू, सुरक्षा और उड़ान संचालन IndiGo द्वारा किया जाता है । ये विमान वर्तमान में दिल्ली–इस्तांबुल और मुंबई–इस्तांबुल मार्गों पर उड़ान भर रहे हैं, जिससे यात्री क्षमता को बढ़ावा मिला है।
पाकिस्तान द्वारा भारतीय वायु मार्गों को बंद किए जाने और भू-राजनीति की चुनौतियों ने IndiGo को लंबी दूरी के मार्गों पर अधिक समय व लागत से परिचालित होने पर मजबूर किया है। यह लीज़ विमान की उपलब्धता इस समस्या के समाधान के लिए रणनीतिक रूप से आवश्यक साबित हुई ।
बोर्ड पर आया राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दा
2025 की शुरुआत में Turkey ने Pakistan का समर्थन किया, जिससे भारत-टर्की संबंध तनावपूर्ण हो गए। उसी दौरान हो रही “Operation Sindoor” के विरोध में, भारत ने Turkish ground handling कंपनी Çelebi की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी थी । इसके मद्देनज़र मई में DGCA ने IndiGo को केवल तीन महीने का “last and final” विस्तार प्रदान किया, और कहा गया कि मार्च बाद इस लीज़ को समाप्त कर दिया जाए ।
क्यों और कैसे मिली अतिरिक्त छूट?
हालांकि मई में DGCA की ओर से अंतिम विस्तार घोषित किया गया, लेकिन बाद में वजहों और आर्थिक चुनौतियों के मद्देनज़र यह निर्णय पुनर्विचार के लिए खुला रखा गया। इसीसी में, DGCA ने अब अगले छह महीने के लिए लीज़ को बढ़ाने की मंज़ूरी दे दी है। यानी अब यह लीज़ 28 फरवरी 2026 तक होगी।
IndiGo ने इस विस्तार के लिए अपनी अनुरोध किया था और कहा कि यह “ऑपरेशनल स्थिरता और निरंतरता” बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा । Aviator spokesperson ने इस लंबी अवधि की मंज़ूरी के लिए रणनीतिक समय पर निर्णय का आभार भी व्यक्त किया।
DGCA के शर्तें और आगे का मार्ग
DGCA ने यह स्पष्ट किया है कि यह लीज़ विस्तार कठोर शर्तों के अधीन है। IndiGo को अगले छह महीने में:
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Dry lease विकल्पों पर विचार करना होगा—जहां केवल विमान लीज़ पर मिलता है, और उसे IndiGo अपनी एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (AOC) के तहत ऑपरेट कर सकता है।
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飞行 कार्रवाइयों में सुरक्षा, ऑपरेशनल नियमों, भारतीय नियमों की जानकारी, crew medical और license रिकॉर्ड, और दो भाषाओं (हिंदी और अंग्रेज़ी) में safety briefings सुनिश्चित करनी होगी ।
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साथ ही, एयरलाइन को उड़ान अनुसूची, पार्ट्स उपलब्धता, और किसी भी घटना की रिपोर्ट DGCA को तुरंत देनी होगी ।
DGCA ने यह भी स्पष्ट किया कि इस लीज़ विस्तार के बाद कोई और अतिरिक्त अवधि उपलब्ध नहीं कराई जाएगी ।
IndiGo की प्रतिक्रिया और लाभ
IndiGo ने कहा:
“यह विस्तार एक ऐसे समय पर आया है, जब भू-राजनीतिक सीमाओं के कारण भारतीय विमानन को नुकसान हो सकता था। इसके कारण peak ट्रैवल सीज़न में यात्रियों के लिए इस्तांबुल सहित दूसरी जगहों पर सीधी और सुविधाजनकेंट्री बनी रहेगी” ।
यह विमानन क्षेत्र के लिए राहत भरा कदम साबित हो रहा है, खासकर तब जब Q1 में IndiGo की राजस्व वृद्धि धीमी हुई।
शेयर बाजार में प्रतिक्रिया
इस विस्तार निर्णय के बाद, InterGlobe Aviation (IndiGo की पैरेंट कंपनी) के शेयर पर निवेशकों की नजर टिकी रही। बाजार में उम्मीद जताई जा रही है कि यह विकास longer-haul क्षमता वृद्धि और संतुलित परिचालन के लिए सकारात्मक संकेतों की ओर इशारा करता है।
व्यापक दिशा और भविष्य की चुनौतियाँ
DFCA का यह समर्पण एक रणनीतिक रुख दर्शाता है—जहां भू-राजनीतिक कारण मुश्किलें पैदा कर रहे हैं, वहाँ सरकार परिचालन जारी रखने की कवायद कर रही है। साथ ही, यह संकेत भी रहा है कि IndiGo को अधिक होता हुआ फ्रेंचाइजी, वाइड-बॉडी खरीद योजना, या Dry lease विकल्पों की ओर दृष्टि गढ़नी होगी ।
IndiGo का भविष्य में Airbus से A350-900 और बड़ी संख्या में narrow-body विमानों का ऑर्डर स्पष्ट करता है कि भविष्य की तैयारी पहले से चल रही है ।
सारांश तालिका
विषय | विवरण |
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लीज़ विस्तार अवधि | मई में मिली अंतिम 3 महीने की विस्तार अवधि अब विस्तारित होकर 28 फरवरी 2026 तक पहुँच गया है। |
शर्तें | Dry lease विकल्पों पर विचार, Hindi/English safety briefs, flight schedule रिकॉर्ड, spares ready, crew compliance आदि शामिल। |
फायदे | ऑपरेशनल निरंतरता, peak season में बेहतर ट्रैवल सेवा, वित्तीय नुकसान से रक्षा। |
बाजार प्रतिक्रिया | शेयर बाजार में सकारात्मक सन्दर्भ, शेयर कीमती हो सकते हैं। |
भविष्य की तैयारी | Dry lease या अपनी wide-body क्षमता विकसित करने की योजना पर बल। |
DGCA द्वारा दी गई इस छह महीने की लीज़ विस्तार ने IndiGo को एक रणनीतिक अंतराल दिया है, जो उसे नई योजनाएँ बनाने, परिचालन स्थिरता बनाए रखने और भारत की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में स्थायित्व लाने में मदद करेगा।
ध्यान रहे कि यह निर्णय केवल एक वक़्त की राहत नहीं है—यह एक संकेत है कि कैसे भू-राजनीतिक और व्यापारिक जरूरतों के बीच संतुलन रखा जा सकता है।