




भारत और जापान के बीच आर्थिक व रणनीतिक रिश्तों को नई गति मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय जापान के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं, और इस यात्रा के दौरान सबसे बड़ा आकर्षण है जापान की ओर से किया जाने वाला $68 अरब डॉलर (करीब ₹5.6 लाख करोड़) का संभावित निवेश।
यह निवेश न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि दोनों देशों के बीच गहराते सहयोग का भी संकेत है। जानकारों का कहना है कि यह भारत–जापान साझेदारी को “नेक्स्ट लेवल” तक ले जाने का ऐतिहासिक कदम होगा।
भारत और जापान दशकों से आर्थिक और रणनीतिक साझेदार रहे हैं। जापान ने हमेशा भारत में आधारभूत ढाँचे (Infrastructure), तकनीकी सहयोग, रेलवे, मेट्रो प्रोजेक्ट्स, औद्योगिक गलियारों और स्मार्ट सिटी विकास में योगदान दिया है। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC) और मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट, जापान के सहयोग के ही उदाहरण हैं।
अब जबकि दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रही है, जापान का यह बड़ा निवेश भारत में उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है $68 अरब डॉलर का निवेश?
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रोज़गार सृजन – अनुमान है कि इस निवेश से लाखों नए रोजगार पैदा होंगे, खासकर मैन्युफैक्चरिंग, आईटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में।
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मेक इन इंडिया को बढ़ावा – प्रधानमंत्री मोदी के “मेक इन इंडिया” अभियान को गति मिलेगी क्योंकि जापानी कंपनियाँ स्थानीय उत्पादन इकाइयाँ स्थापित कर सकती हैं।
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ग्रीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर – जापान नवीकरणीय ऊर्जा और हाई-टेक्नोलॉजी का बड़ा खिलाड़ी है। भारत को आधुनिक टेक्नोलॉजी और हरित विकास के क्षेत्र में सहयोग मिलेगा।
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वैश्विक संकेत – यह निवेश दुनिया को संकेत देगा कि भारत आज भी विदेशी पूंजी निवेश (FDI) के लिए सबसे आकर्षक और भरोसेमंद गंतव्य है।
पीएम मोदी टोक्यो में 15वें भारत–जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। उनके साथ कई वरिष्ठ मंत्री और उद्योगपति भी गए हैं। इस दौरान होने वाली वार्ताओं का मुख्य केंद्र होगा:
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द्विपक्षीय व्यापार संबंध
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टेक्नोलॉजी और रक्षा सहयोग
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जलवायु परिवर्तन और ग्रीन एनर्जी
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हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा
साथ ही, जापान में भारतीय समुदाय ने पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया। उन्हें गायत्री मंत्र, भजन और लोकगीतों के साथ सांस्कृतिक अंदाज़ में सम्मानित किया गया।
यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर है। अमेरिकी टैरिफ नीतियों ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में जापान और भारत का नज़दीक आना एशिया में एक नए आर्थिक और रणनीतिक गठजोड़ का संकेत देता है।
भारत, जहाँ बड़ी उपभोक्ता बाज़ार है और सस्ती श्रमशक्ति उपलब्ध है, वहीं जापान तकनीकी रूप से सशक्त है। दोनों की साझेदारी से न केवल द्विपक्षीय संबंध मज़बूत होंगे, बल्कि यह एशिया और दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता प्रदान कर सकता है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह निवेश भारत के लिए गेम चेंजर साबित होगा।
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डॉ. अरुण मिश्रा, वरिष्ठ आर्थिक विश्लेषक, कहते हैं:
“भारत की ग्रोथ स्टोरी को गति देने के लिए यह निवेश बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही है, जापान का यह भरोसा भारत की क्षमता को प्रमाणित करता है।” -
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जापान के साथ सहयोग न केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित रहेगा, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता का भी आधार बनेगा।