




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जापान दौरा केवल कूटनीति और निवेश समझौतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रंगों ने और भी खास बना दिया। टोक्यो पहुंचते ही पीएम मोदी का स्वागत जिस अंदाज़ में हुआ, उसने पूरे माहौल को भारतीय संस्कृति की महक से भर दिया। गायत्री मंत्र, भजन और लोकगीतों के साथ जापानी और भारतीय समुदाय ने उनका अभिनंदन किया।
जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी अपने आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए टोक्यो पहुंचे, स्थानीय भारतीय मूल के लोग और जापानी नागरिक एकत्र हुए। स्वागत के दौरान गायत्री मंत्र का उच्चारण हुआ। भारतीय संस्कृति में गायत्री मंत्र को सर्वोच्च आध्यात्मिक मंत्र माना जाता है, और इसे जापान में सुनना वहाँ मौजूद सभी लोगों के लिए एक अद्भुत अनुभव था।
पीएम मोदी ने भी इस मौके पर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और कहा कि यह न केवल उनका बल्कि पूरे भारत का सम्मान है।
कार्यक्रम में कई जापानी कलाकारों और भारतीय समुदाय ने लोकगीतों और भजनों की प्रस्तुति दी। पारंपरिक ढोल, वीणा और अन्य वाद्य यंत्रों की धुन पर भारत और जापान की संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला।
भारतीय समुदाय के बच्चों ने भी पारंपरिक परिधान पहनकर नृत्य प्रस्तुत किया। इस मौके पर ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की झलक साफ दिखाई दी।
दिलचस्प बात यह रही कि केवल भारतीय प्रवासी ही नहीं, बल्कि जापानी नागरिकों ने भी इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की। कई जापानी नागरिक भारतीय परिधानों में नजर आए और भजनों के साथ सुर मिलाते दिखे।
यह भारत और जापान के बीच गहरी सांस्कृतिक समझ और आपसी जुड़ाव का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस भव्य स्वागत से अभिभूत होकर कहा:
“यह स्वागत केवल मेरा नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। भारत और जापान का रिश्ता केवल रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं है, यह दिल और आत्मा का रिश्ता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और जापान की दोस्ती में आध्यात्मिक गहराई और सांस्कृतिक सामंजस्य हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत और जापान के रिश्ते सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्तर पर भी बेहद मजबूत हैं। बौद्ध धर्म का उद्गम भारत में हुआ और यह जापान तक पहुँचा, जिसने दोनों देशों के बीच गहरी आध्यात्मिक डोर बाँधी।
आज जब पीएम मोदी का स्वागत जापान में मंत्रों और भजनों के साथ होता है, तो यह उस प्राचीन रिश्ते की पुनः पुष्टि करता है।
जापान में बसे भारतीय प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आईटी, शिक्षा और व्यापार क्षेत्र में कार्यरत भारतीयों ने जापान में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इस समुदाय ने ही पीएम मोदी के स्वागत की पूरी तैयारी की थी।
उनके अनुसार, “प्रधानमंत्री मोदी भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े दूत हैं। उनका जापान आना हम सबके लिए गर्व का क्षण है।”
यह स्वागत केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत–जापान संबंधों को और गहरा करने का प्रतीक है। जैसे-जैसे दोनों देश आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी साझेदारी में आगे बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे सांस्कृतिक बंधन इस रिश्ते को और मजबूत करेंगे।