




भारत में खेलों का महत्व लगातार बढ़ रहा है और अब तेलंगाना राज्य ने इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने खेल क्षेत्र के बजट को 16 गुना बढ़ाने की घोषणा की है। इस निर्णय को न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश के खेल परिदृश्य के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
तेलंगाना का स्पष्ट लक्ष्य है – राज्य को आने वाले वर्षों में ‘वैश्विक खेल हब’ के रूप में स्थापित करना।
इतिहास और पृष्ठभूमि
तेलंगाना एक ऐसा राज्य है, जिसने बीते कुछ वर्षों में क्रिकेट, बैडमिंटन और कुश्ती जैसे खेलों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हैदराबाद बैडमिंटन का गढ़ बन चुका है और यहां से पी.वी. सिंधु और साइना नेहवाल जैसे विश्वस्तरीय खिलाड़ी निकल चुके हैं।
लेकिन अब सरकार का इरादा सिर्फ कुछ खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि फुटबॉल, एथलेटिक्स, हॉकी, कबड्डी और स्विमिंग जैसे विभिन्न खेलों में विश्व स्तर की प्रतिभा विकसित करना है।
खेल बजट में 16 गुना वृद्धि
पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस बार राज्य सरकार ने खेल बजट को 16 गुना अधिक कर दिया है।
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पहले जहाँ बजट केवल ₹500 करोड़ के आसपास था, अब इसे बढ़ाकर ₹8,000 करोड़ से अधिक कर दिया गया है।
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यह रकम स्टेडियम निर्माण, नई खेल अकादमियों, कोचिंग सुविधाओं और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग देने पर खर्च की जाएगी।
यह देश के किसी भी राज्य का अब तक का सबसे बड़ा खेल बजट है।
मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा:
“हमारा लक्ष्य सिर्फ राष्ट्रीय खेल उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। तेलंगाना को आने वाले वर्षों में दुनिया के नक्शे पर एक खेल राजधानी बनाना है। हमारे खिलाड़ी ओलंपिक और विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेंगे।”
बजट का इस्तेमाल कहाँ होगा?
सरकार ने खेल बजट को कई हिस्सों में विभाजित किया है:
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विश्वस्तरीय स्टेडियम निर्माण – हैदराबाद और अन्य प्रमुख शहरों में ओलंपिक मानकों के स्टेडियम बनाए जाएंगे।
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खेल अकादमी और प्रशिक्षण केंद्र – हर जिले में कम से कम एक आधुनिक स्पोर्ट्स अकादमी खोली जाएगी।
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अंतरराष्ट्रीय कोचों की नियुक्ति – खिलाड़ियों को विदेश जाने की बजाय भारत में ही विश्वस्तरीय कोच उपलब्ध कराए जाएंगे।
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ग्रामीण खेलों पर जोर – कबड्डी, खो-खो और कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहन – महिला खिलाड़ियों के लिए विशेष योजनाएं और छात्रवृत्तियाँ चलाई जाएंगी।
खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया
तेलंगाना के बैडमिंटन स्टार्स और युवा खिलाड़ियों ने इस पहल का स्वागत किया है।
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पीवी सिंधु ने कहा: “तेलंगाना सरकार ने हमेशा खेलों को प्राथमिकता दी है। इस बार का कदम अभूतपूर्व है। इससे नई पीढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अवसर मिलेगा।”
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युवा एथलीटों का मानना है कि अब उन्हें ट्रेनिंग के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
खेल विशेषज्ञों की राय
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के विशेषज्ञों का मानना है कि तेलंगाना का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
स्पोर्ट्स विश्लेषक हर्षा भोगले ने ट्वीट किया:
“तेलंगाना का स्पोर्ट्स बजट सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी है। भारत को ओलंपिक महाशक्ति बनाने के लिए ऐसे ही विज़न की जरूरत है।”
वैश्विक हब बनने की राह
तेलंगाना ने सिर्फ बजट ही नहीं बढ़ाया, बल्कि ‘स्पोर्ट्स टूरिज्म पॉलिसी’ भी बनाई है।
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हैदराबाद में आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन कराने की योजना है।
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सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक तेलंगाना एशिया के शीर्ष खेल स्थलों में शामिल हो।
संभावित चुनौतियाँ
हालांकि, इतनी बड़ी पहल के साथ चुनौतियाँ भी हैं:
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बजट का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना।
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ग्रामीण स्तर पर खेलों को लोकप्रिय बनाना।
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खिलाड़ियों को सिर्फ सुविधाएँ ही नहीं, बल्कि मानसिक और पोषण संबंधी सहयोग भी उपलब्ध कराना।
अगर सरकार इन चुनौतियों का समाधान कर पाती है, तो निश्चित ही तेलंगाना विश्व खेल मानचित्र पर बड़ी पहचान बना सकता है।