मध्य प्रदेश सरकार ने श्रमिक परिवारों के उत्थान और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगुवाई में राज्य सरकार संबल योजना के तहत 1,112 श्रमिक परिवारों और 22 एक्स-रे तकनीशियनों को लाभ पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
इस पहल के तहत करीब ₹175 करोड़ की आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री एक क्लिक के माध्यम से इस राशि का वितरण करेंगे।
संबल योजना मध्य प्रदेश सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों, विशेषकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को सहारा देना है। इस योजना के तहत दुर्घटना में मृतक श्रमिक परिवारों को राहत दी जाती है। महिलाओं को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। साथ ही, विभिन्न श्रमिक वर्गों को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े लाभ उपलब्ध कराए जाते हैं। इस बार की पहल में सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी शामिल किया है, जिससे स्वरोज़गार और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को भी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी श्रमिक परिवार को आर्थिक तंगी के कारण परेशान न होना पड़े। कुल 1,112 श्रमिक परिवारों को इस आर्थिक सहायता से सीधा लाभ मिलेगा। 22 एक्स-रे तकनीशियनों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। आर्थिक सहायता का उद्देश्य प्रभावित परिवारों की तात्कालिक जरूरतें पूरी करना और उन्हें पुनर्वास में मदद करना है। सरकार का कहना है कि यह पहल “सबका साथ, सबका विकास” की भावना को मजबूती देती है।
मध्य प्रदेश सरकार ने इस कार्यक्रम में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के पंजीकरण की शुरुआत भी की है। गिग वर्कर्स वे हैं जो ऐप आधारित सेवाओं जैसे डिलीवरी, राइड-शेयरिंग, होम सर्विसेज़ आदि से जुड़े होते हैं। अब तक यह श्रमिक वर्ग पारंपरिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से बाहर रह जाता था। पंजीकरण के बाद उन्हें भी स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना राहत और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिलेगा। यह कदम राज्य में डिजिटल इकोनॉमी के श्रमिकों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
सीएम मोहन यादव ने कहा है कि उनकी सरकार का उद्देश्य श्रमिक वर्ग को केवल तत्काल राहत देना नहीं है, बल्कि उनके जीवन स्तर को स्थायी रूप से बेहतर बनाना है।
उन्होंने कहा:
“संबल योजना हमारे श्रमिक भाई-बहनों के लिए सुरक्षा कवच है। चाहे वे खेतों में काम करें, फैक्ट्री में या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर, सरकार उनके साथ खड़ी है।”
इस आर्थिक सहायता का एक बड़ा हिस्सा उन परिवारों और महिलाओं को लक्षित करता है, जिन्होंने हाल ही में अपने परिजनों को दुर्घटनाओं में खोया है।महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके आर्थिक बोझ को कम करने के लिए यह राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इसके अलावा, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े लाभ भी संबल योजना के तहत उपलब्ध रहेंगे। यह पहल ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कारगर साबित हो सकती है।
मध्य प्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से लगातार श्रमिक वर्ग और गरीब परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रही है। किसानों के लिए राहत पैकेज। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार। शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं। संबल योजना इन सभी में सबसे व्यापक है क्योंकि इसका लाभ सीधे समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचता है।
इस घोषणा के बाद श्रमिक परिवारों और आम नागरिकों में खुशी का माहौल है। लाभार्थी परिवारों का कहना है कि यह सहायता उनके लिए कठिन समय में बड़ी मदद साबित होगी। गिग वर्कर्स ने भी पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में और अधिक लाभ मिलेंगे। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने मुख्यमंत्री के इस कदम की सराहना की है।
मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल श्रमिक परिवारों और गिग वर्कर्स के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। संबल योजना के तहत दी जा रही ₹175 करोड़ की आर्थिक सहायता न केवल तात्कालिक राहत है, बल्कि यह श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक भी है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह कदम स्पष्ट करता है कि सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के उत्थान के लिए लगातार काम कर रही है। आने वाले समय में गिग वर्कर्स और अन्य असंगठित श्रमिकों को योजनाओं में शामिल करना भारत में समावेशी विकास की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।








