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  • उपराष्ट्रपति चुनाव के बीच कांग्रेस का हमला: जगदीप धनखड़ की चुप्पी और अचानक गायब होने पर उठे सवाल

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         भारत में उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। इस बीच कांग्रेस पार्टी ने मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की चुप्पी और उनकी अचानक सार्वजनिक मंचों से अनुपस्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धनखड़ देश के उपराष्ट्रपति होते हुए भी इस अहम समय पर कहीं नज़र नहीं आ रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि उनकी चुप्पी और अचानक ‘गायब’ हो जाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और इससे जनता में संदेह पैदा होता है।

    कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि,

    “जगदीप धनखड़ जी अब तक अपनी भूमिका और उपस्थिति को लेकर बेहद सक्रिय रहे हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले उनकी चुप्पी और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी समझ से परे है। देश जानना चाहता है कि आखिर वे अचानक कहां गायब हो गए।”

    कांग्रेस का यह भी कहना है कि धनखड़ का यह रवैया कहीं न कहीं सत्तारूढ़ दल की रणनीति से जुड़ा हो सकता है।

    भारतीय संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। उनका कर्तव्य केवल सदन का संचालन ही नहीं बल्कि राजनीतिक संतुलन बनाए रखना भी है। ऐसे में कांग्रेस का सवाल है कि जब उपराष्ट्रपति चुनाव जैसे महत्वपूर्ण समय में देश की राजनीति में हलचल है, तो धनखड़ की अनुपस्थिति का क्या कारण है?

    कांग्रेस के आरोपों को विपक्षी दलों का भी आंशिक समर्थन मिला है। कई विपक्षी नेताओं का मानना है कि यह समय उपराष्ट्रपति के लिए जनता के सामने आने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर स्पष्ट रुख रखने का है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल (भाजपा) ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा उछालने की कोशिश है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस का यह बयान सीधे-सीधे चुनावी रणनीति का हिस्सा है। पहला, विपक्ष चाहता है कि उपराष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे को जनता के बीच लाकर भाजपा को कटघरे में खड़ा किया जाए। दूसरा, कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा और उसके सहयोगियों के नेता पारदर्शिता से दूर हैं। तीसरा, यह सवाल उठाकर कांग्रेस अपने समर्थकों को एकजुट करना चाहती है।

    सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। ट्विटर (अब X), फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या सचमुच धनखड़ सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए हुए हैं या यह केवल कांग्रेस का आरोप है।

    कुछ लोगों का मानना है कि यह पूरी तरह से विपक्ष का चुनावी दांव है, जबकि कुछ का कहना है कि उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह के विवाद से बचना चाहिए और खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

    उपराष्ट्रपति चुनाव हर छह साल में होता है और इसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य मतदान करते हैं। इस बार का चुनाव और भी दिलचस्प इसलिए है क्योंकि देश में लोकसभा चुनाव के बाद की राजनीति का असर साफ तौर पर उपराष्ट्रपति चुनाव पर दिखाई दे रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही अपनी रणनीतियों को तेज कर चुके हैं।

    कांग्रेस द्वारा जगदीप धनखड़ की चुप्पी और अचानक अनुपस्थिति पर सवाल उठाना उपराष्ट्रपति चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना रहा है। जहां सत्ता पक्ष इसे विपक्ष का दांव मान रहा है, वहीं कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतांत्रिक जवाबदेही से जोड़कर जनता के सामने ला रही है।

    अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में उपराष्ट्रपति खुद इस पर कोई बयान देते हैं या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि यह मुद्दा चुनावी माहौल को और गरमाने वाला है।

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