कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर गंभीर बयान दिया। उन्होंने इसे ‘विधायी ट्रोजन हॉर्स’ (Legislative Trojan Horse) बताया और कहा कि इस विधेयक के माध्यम से देश के लोकतांत्रिक ढांचे में खतरनाक बदलाव लाए जा सकते हैं।
खरगे के मुताबिक, विधेयक का ऊपर से मकसद सही प्रतीत हो सकता है, लेकिन इसके माध्यम से केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की शक्तियों में असंतुलन पैदा हो सकता है। उनका यह भी कहना है कि भाजपा-आरएसएस इस विधेयक के जरिए संविधान में मौजूद लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकार का कहना है कि यह संशोधन मुख्य रूप से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की नियुक्ति और कार्यकाल से जुड़ी प्रक्रियाओं में सुधार लाने के लिए है। विधेयक में केंद्र और राज्य स्तर पर कार्यपालिका की भूमिका को स्पष्ट करने का प्रस्ताव है। सरकार के अनुसार, यह विधेयक प्रशासनिक कार्यों को सुगम और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने इसे गंभीर लोकतांत्रिक खतरे के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि यदि इसे बिना गहन समीक्षा के लागू किया गया तो यह संविधान में मौलिक अधिकारों और संघीय ढांचे पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
खरगे ने विधेयक को ‘ट्रोजन हॉर्स’ कहकर इसका विश्लेषण किया। इसका मतलब यह है कि विधेयक के पीछे छिपा असली उद्देश्य सीधे तौर पर जनता या लोकतंत्र के हित में नहीं है। ऊपर से यह सुधार का बिल लगता है। लेकिन अंदर छिपे प्रावधान लोकतांत्रिक अधिकारों को कमज़ोर करने वाले हैं। लोकतंत्र में checks and balances को कमजोर करने की संभावना।
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रोजन हॉर्स की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब कोई कानून या विधेयक किसी सामान्य या सकारात्मक उद्देश्य के पीछे छिपे हुए खतरों को लागू करता है।
इस बिल पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
-
कांग्रेस का दृष्टिकोण: खरगे ने कहा कि यह बिल केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन बिगाड़ सकता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकता है।
-
भाजपा का दृष्टिकोण: भाजपा ने कहा कि यह संशोधन प्रशासनिक कार्यों में स्पष्टता लाने और सरकार की जवाबदेही बढ़ाने के लिए जरूरी है।
-
विशेषज्ञों की राय: राजनीतिक और संवैधानिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस विधेयक की समीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि संघीय ढांचे और मौलिक अधिकारों को सुरक्षित रखा जा सके।
130वें संविधान संशोधन के प्रावधानों पर विशेषज्ञों ने कहा कि इसे गहन अध्ययन के बिना लागू करना खतरनाक हो सकता है। प्रमुख बिंदु हैं:
-
कार्यपालिका पर नियंत्रण: प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव।
-
संघीय ढांचे में असंतुलन: राज्यों की स्वायत्तता पर संभावित असर।
-
लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा: नागरिकों और विपक्षी दलों के हक में कमी का खतरा।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि संसद और राज्य विधानसभा में विस्तृत चर्चा के बाद ही इसे लागू किया जाना चाहिए।
विपक्षी दल इस विधेयक को संसद में चुनौती दे सकते हैं। सामाजिक और राजनीतिक विमर्श बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए ऐसे संवेदनशील कानूनों पर खुली बहस जरूरी है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 130वें संविधान संशोधन बिल को ‘विधायी ट्रोजन हॉर्स’ बताते हुए चेतावनी दी है कि यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि उपरी तौर पर सुधार का बिल लगने के बावजूद इसके पीछे छिपे प्रावधान संवैधानिक अधिकारों और संघीय संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।








