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कांग्रेस कार्यकर्ता प्रकाश ‘मामा’ पगारे द्वारा सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की मॉर्फ्ड फोटो शेयर करने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस फोटो में प्रधानमंत्री को साड़ी में दिखाया गया था और इसके साथ एक अपमानजनक गाना भी जोड़ा गया था। इस पोस्ट के वायरल होते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी फैल गई और उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के अपमान के रूप में देखा।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस प्रकार की पोस्ट सिर्फ व्यक्तिगत अपमान ही नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के प्रधानमंत्री और उनके सम्मान के खिलाफ है। सोशल मीडिया पर वायरल इस तस्वीर ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। बीजेपी के कई नेताओं ने इस घटना को गंभीर मानते हुए पुलिस और संबंधित प्लेटफार्म से कार्रवाई की मांग की है।
कांग्रेस कार्यकर्ता प्रकाश पगारे ने फोटो शेयर करने के बाद दावा किया कि उनका इरादा किसी का अपमान करना नहीं था, बल्कि यह राजनीतिक सतीर (satire) थी। हालांकि, सोशल मीडिया पर आलोचनाओं की बौछार हुई और कई लोगों ने इसे अनुचित और असंवैधानिक कार्रवाई बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म राजनीतिक और सामाजिक विवादों का नया केंद्र बन गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि डिजिटल माध्यम पर पोस्ट की गई किसी भी सामग्री का व्यापक असर पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री सिर्फ व्यक्तिगत स्तर तक ही नहीं रहती, बल्कि यह पूरे राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती है।
बीजेपी के नेताओं ने इस मामले में स्पष्ट किया कि किसी भी नेता या कार्यकर्ता द्वारा प्रधानमंत्री का अपमान सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रकाश पगारे जैसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि सोशल मीडिया पर राजनीतिक व्यंग्य और आलोचना की स्वतंत्रता लोकतंत्र का हिस्सा है।
सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने भी इस पोस्ट को लेकर दो खेमों में प्रतिक्रिया दी। एक तरफ समर्थक इसे हास्य या व्यंग्य मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे देश के प्रधानमंत्री के सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं। इस विवाद ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के विवाद यह भी दिखाते हैं कि राजनीतिक दल डिजिटल माध्यमों का उपयोग कितने प्रभावी या नुकसानदायक तरीके से कर रहे हैं। यह घटना केवल प्रकाश पगारे तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि इसे व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बना दिया गया।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी की मॉर्फ्ड फोटो का मामला केवल सोशल मीडिया विवाद नहीं बल्कि राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से भी गंभीर है। यह दर्शाता है कि डिजिटल प्लेटफार्मों पर सामग्री साझा करते समय संवेदनशीलता, सम्मान और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखना कितना आवश्यक है।








