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  • अमित शाह का कांग्रेस पर हमला: आजादी के बाद खादी को भुलाया, मोदी सरकार ने फिर दिलाई पहचान

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    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आजादी के बाद सबसे बड़ी भूल यह रही कि कांग्रेस ने खादी को नज़रअंदाज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि खादी केवल एक कपड़ा नहीं बल्कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक रही है। मगर आजादी के बाद सत्ता में आने वाली सरकारों ने इसे महत्व नहीं दिया। शाह ने कहा कि खादी का असली सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में हुआ है, जिसने खादी को न केवल राष्ट्रीय बल्कि वैश्विक पहचान दिलाई।

    अमित शाह ने कहा कि खादी में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की भावना समाहित है। आजादी के समय जब महात्मा गांधी ने खादी का प्रचार किया, तब यह अंग्रेजी शासन के खिलाफ एक आंदोलन का प्रतीक बन गई थी। गांधीजी ने इसे जन-जन से जोड़ा और विदेशी कपड़ों के बहिष्कार का संदेश दिया। लेकिन आजादी के बाद कांग्रेस सरकारों ने खादी को किनारे कर दिया और औद्योगिक उत्पादों पर ज्यादा जोर दिया।

    गृह मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मोदी सरकार के प्रयासों से खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) का कारोबार पिछले दस वर्षों में कई गुना बढ़ा है। जहां पहले खादी सीमित दायरे में रह गई थी, वहीं अब इसकी मांग देश-विदेश दोनों जगह बढ़ी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद खादी को बढ़ावा देने की शुरुआत तब की जब उन्होंने राष्ट्र को ‘वोकल फॉर लोकल’ का मंत्र दिया।

    शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हर मंच से खादी पहनकर यह संदेश दिया कि भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देना हर नागरिक का कर्तव्य है। उनके इस कदम से लोगों में खादी के प्रति रुचि बढ़ी है। आज युवाओं से लेकर बड़े डिजाइनर तक खादी को आधुनिक फैशन से जोड़ रहे हैं। इससे खादी केवल परंपरा का प्रतीक नहीं रही, बल्कि नए जमाने का फैशन स्टेटमेंट भी बन गई है।

    उन्होंने यह भी बताया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत खादी को विशेष महत्व दिया गया है। KVIC द्वारा संचालित योजनाओं से लाखों ग्रामीणों और कारीगरों को रोजगार मिला है। चरखे और हथकरघे पर बनने वाले उत्पाद आज बाजार में अच्छी कीमत पा रहे हैं। यह न सिर्फ गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि शहरों में भी खादी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

    अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि आजादी के तुरंत बाद खादी को सही दिशा में बढ़ावा दिया जाता तो आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टेक्सटाइल हब बन सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों ने खादी को ‘गरीब आदमी का कपड़ा’ बताकर इसकी छवि को सीमित कर दिया। जबकि हकीकत यह है कि खादी भारत की ताकत और आत्मसम्मान का प्रतीक है।

    मोदी सरकार के कार्यकाल में खादी का कारोबार नए मुकाम पर पहुंचा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स साइट्स पर खादी उत्पादों की बिक्री ने युवाओं और शहरी ग्राहकों को भी इससे जोड़ दिया है। शाह ने कहा कि आज खादी केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में खादी को विशेष स्थान दिया जा रहा है और यह “इको-फ्रेंडली” कपड़े के रूप में पहचान बना रही है।

    गृह मंत्री ने कहा कि यह बदलाव केवल नीतिगत निर्णयों से संभव नहीं हुआ, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत पहल और उनके विचारों ने खादी को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने कई बार कहा है कि भारत का हर नागरिक अगर खादी उत्पाद खरीदे तो लाखों ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुधर सकती है।

    इस मौके पर शाह ने आत्मनिर्भर भारत के व्यापक दृष्टिकोण की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना केवल एक नारा नहीं बल्कि भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का सबसे बड़ा मार्ग है। खादी इसका सबसे सटीक उदाहरण है, क्योंकि यह ग्रामीण रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय गौरव तीनों को साथ लेकर चलता है।

    उन्होंने कहा कि मोदी सरकार आने के बाद खादी बिक्री में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। KVIC की रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्षों में खादी की बिक्री 400 प्रतिशत तक बढ़ी है। इससे जुड़े कारीगरों की आय में भी बड़ा सुधार हुआ है। यही नहीं, खादी अब स्कूल यूनिफॉर्म, सरकारी उपक्रमों और यहां तक कि डिफेंस यूनिफॉर्म का भी हिस्सा बन रही है।

    शाह ने लोगों से अपील की कि वे खादी अपनाएं और आत्मनिर्भर भारत की राह में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि आज का भारत वैश्विक शक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है और खादी इस यात्रा का एक अभिन्न हिस्सा है। यह न केवल कपड़े की बात है बल्कि एक सोच है, एक विचार है, जो हर भारतीय को जोड़ता है।

    अमित शाह का यह बयान न केवल कांग्रेस पर हमला है बल्कि यह भी दर्शाता है कि मोदी सरकार खादी को राष्ट्रीय अभियान बनाकर भारत की पहचान को मजबूती दे रही है। आज खादी केवल अतीत की धरोहर नहीं बल्कि भविष्य की संभावनाओं का प्रतीक बन चुकी है।

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