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बॉलीवुड की सुपरस्टार दीपिका पादुकोण इन दिनों सुर्खियों में हैं, और वजह है उनका वह बयान, जिसने कुछ समय पहले फिल्म इंडस्ट्री में बहस छेड़ दी थी — “मैं केवल 8 घंटे की शिफ्ट में ही काम करती हूं।” इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या दीपिका अब काम को लेकर सीमाएं तय कर रही हैं या फिर इंडस्ट्री के पारंपरिक कामकाजी ढांचे से दूरी बना रही हैं। अब दीपिका ने इस पूरे विवाद पर पहली बार खुलकर बात की है।
‘वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे’ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में दीपिका पादुकोण ने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया। उन्होंने कहा,
“मैं कभी भी अपने काम से दूरी बनाने वाली या सीमाएं तय करने वाली इंसान नहीं रही हूं। मैंने हमेशा काम को पूजा माना है। 8 घंटे की शिफ्ट वाला बयान मेरे लिए सिर्फ संतुलित जीवन की बात थी, न कि काम से बचने का तरीका। मैं ऐसे माहौल में पली-बढ़ी हूं जहां समर्पण, अनुशासन और मेहनत ही सफलता की कुंजी है।”
दीपिका ने यह भी स्पष्ट किया कि वह “8 घंटे की शिफ्ट” का मतलब काम की सीमाएं नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के संतुलन से जोड़कर कह रही थीं। उन्होंने कहा, “फिल्मों की शूटिंग में 14-16 घंटे तक काम करना आम बात है, लेकिन इसका असर हमारे शरीर और मन दोनों पर पड़ता है। मैं बस यही कहना चाहती थी कि हमें अपने और अपनी टीम के मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दीपिका पादुकोण लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ी रही हैं। हाल ही में खबर आई थी कि वह संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ और प्रभास स्टारर ‘कल्कि 2898 एडी’ के सीक्वल से बाहर हो चुकी हैं। इन दोनों फिल्मों को लेकर काफी चर्चा थी और उनके बाहर होने पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब दीपिका के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि उनके फैसले पेशेवर प्राथमिकताओं से जुड़े हैं, न कि काम से दूरी के कारण।
दीपिका पादुकोण ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि वह अपने काम में पूरी ईमानदारी और जुनून के साथ डूबी रहती हैं। उन्होंने कहा, “मैं आज जो भी हूं, अपनी मेहनत के बल पर हूं। मैं उस दौर से गुज़री हूं जब मैंने एक साथ तीन-तीन फिल्मों की शूटिंग की, ट्रैवल किया और उसी दिन प्रमोशन इवेंट्स में हिस्सा लिया। यह सब मुझे थकाता नहीं, बल्कि प्रेरित करता है। लेकिन अब मुझे यह एहसास हुआ है कि शरीर और मन को आराम देना भी उतना ही जरूरी है जितना काम करना।”
दीपिका का यह बयान न केवल उनके फैंस के लिए बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। बॉलीवुड में लंबे समय से कलाकारों की कार्यशैली को लेकर सवाल उठते रहे हैं — शूटिंग शेड्यूल की अनिश्चितता, नींद की कमी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं आम हैं। दीपिका ने अपने अनुभवों से यह संकेत दिया है कि संतुलन बनाना ही दीर्घकालिक सफलता का सूत्र है।
‘वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे’ के मौके पर दीपिका ने यह भी कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत को सामान्य बनाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, “कई साल पहले मैंने भी डिप्रेशन का सामना किया था और तभी मुझे एहसास हुआ कि हमारे देश में इस विषय पर बातचीत कितनी कम होती है। आज मैं खुश हूं कि लोग इस पर खुलकर बात कर रहे हैं और सहायता लेने में झिझक नहीं रहे।”
दीपिका पादुकोण ने अपने फाउंडेशन “Live Love Laugh” के जरिए पिछले कई वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम किया है। इस फाउंडेशन का मकसद अवसाद से जूझ रहे लोगों को सहायता और जागरूकता प्रदान करना है। वह कहती हैं, “जब मैं डिप्रेशन से निकली, तब मैंने तय किया कि अब मैं उन लोगों की आवाज़ बनूंगी जो अपनी मानसिक समस्याओं के कारण खुद को अकेला महसूस करते हैं। मेरे लिए यह एक मिशन बन चुका है।”
हाल ही में दीपिका को लेकर यह भी खबरें आई थीं कि वह मां बनने की तैयारी कर रही हैं, और इसी कारण उन्होंने कुछ प्रोजेक्ट्स से दूरी बनाई है। हालांकि अभिनेत्री ने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि जीवन के हर चरण में प्राथमिकताएं बदलना स्वाभाविक है और हर इंसान को अपने निर्णयों के लिए खुद जिम्मेदार होना चाहिए।
फिल्मी मोर्चे पर दीपिका की झोली में अभी भी कई बड़े प्रोजेक्ट हैं। वह जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय वेब सीरीज में नजर आने वाली हैं, जिसकी शूटिंग अगले साल की शुरुआत में शुरू होगी। इसके अलावा वह एक महिला-केंद्रित फिल्म पर भी काम कर रही हैं, जिसे खुद वह को-प्रोड्यूस करेंगी।
दीपिका पादुकोण का यह बयान उन आलोचकों के लिए भी जवाब है जो उनके पेशेवर रवैये पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उनके लिए काम अब भी सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन साथ ही वह मानसिक संतुलन और व्यक्तिगत जीवन को भी उतना ही महत्व देती हैं।
दीपिका ने बातचीत के अंत में कहा, “मैं हर उस व्यक्ति को बताना चाहती हूं जो सोचता है कि सीमित घंटे काम करना आलस या गैर-पेशेवरता है — ऐसा नहीं है। संतुलन ही असली सफलता है। काम जितना जरूरी है, खुद का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है।”
दीपिका पादुकोण के इस बयान ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह केवल एक स्टार नहीं, बल्कि एक विचारशील इंसान भी हैं, जो अपने अनुभवों से समाज को जागरूक करने में विश्वास रखती हैं। उनकी यह सच्चाई और आत्मचिंतन की भावना ही उन्हें बॉलीवुड की सबसे सशक्त और प्रेरणादायक हस्तियों में से एक बनाती है।








