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भारत सरकार विदेशों में नौकरी दिलाने के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़ों और अवैध प्रवासन को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसके तहत सरकार 1983 के इमिग्रेशन एक्ट को बदलने की योजना बना रही है और इसके स्थान पर ओवरसीज मोबिलिटी (सुविधा और कल्याण) बिल, 2025 लाने की तैयारी में है। इस बिल का उद्देश्य उन भारतीय नागरिकों को सुरक्षा और सुविधा प्रदान करना है, जो विदेश में नौकरी करने जाते हैं, साथ ही नौकरी दिलाने के नाम पर हो रहे धोखाधड़ी और गलत तरीके से देशों में प्रवेश कराने के मामलों को नियंत्रित करना है।
1983 का इमिग्रेशन एक्ट तब लागू हुआ था, जब विदेश रोजगार के अवसर सीमित और नियंत्रित थे। उस समय विदेश जाने वाले लोगों की सुरक्षा और प्रवासन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना मुख्य उद्देश्य था। लेकिन पिछले चार दशकों में वैश्विक नौकरी बाजार, प्रवासन की प्रवृत्तियाँ और फर्जीवाड़ों के मामले बहुत बदल गए हैं। इसके चलते वर्तमान कानून कई मामलों में अप्रभावी साबित हुआ है और नई तकनीक और इंटरनेट के माध्यम से होने वाले फर्जीवाड़ों को नियंत्रित नहीं कर पा रहा है।
ओवरसीज मोबिलिटी बिल, 2025 का लक्ष्य केवल नियंत्रण और सुरक्षा ही नहीं, बल्कि व्यवस्थित और पारदर्शी प्रक्रिया भी सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि इस बिल के लागू होने के बाद विदेश में नौकरी दिलाने वाले एजेंटों और कंपनियों की विश्वसनीयता की जांच करना अनिवार्य होगा। साथ ही किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या गलत जानकारी देने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इस बिल में कई प्रमुख प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। सबसे पहले, विदेशी रोजगार की प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा, जिससे आवेदन और नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया ट्रैक की जा सकेगी। दूसरा, रोजगार एजेंटों और रिक्रूटमेंट एजेंसियों को सरकारी लाइसेंस के बिना काम करने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही, विदेश में नौकरी दिलाने वाले एजेंटों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और उनके खिलाफ शिकायतें ऑनलाइन दर्ज की जा सकेंगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि नया कानून श्रमिकों के हितों की सुरक्षा पर केंद्रित होगा। विदेश में काम करने वाले भारतीय नागरिकों को रोजगार की शर्तों, वेतन, सुरक्षा और रहने की सुविधाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा, अगर कोई नागरिक अपने रोजगार के दौरान किसी प्रकार की समस्या का सामना करता है, तो उसे भारत सरकार के ओवरसीज मोबिलिटी पोर्टल और हेल्पलाइन के माध्यम से मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल न केवल फर्जीवाड़ों को रोकेगा, बल्कि भारत से विदेश जाने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और कल्याण को भी सुनिश्चित करेगा। पहले जहां एजेंट और कंपनियां बिना निगरानी के काम कर रहे थे, अब उन्हें सरकारी मानक और नियमों के अनुसार काम करना होगा। इससे युवाओं और नौकरी चाहने वालों को भरोसा मिलेगा कि उनका करियर सुरक्षित हाथों में है।
केंद्र सरकार का यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि को मजबूत करेगा। देश की युवा प्रतिभा को संरक्षित और सुरक्षित तरीके से विदेश भेजने से भारतीय नागरिकों की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और विदेशी रोजगार बाजार में भारतीयों के प्रति भरोसा भी मजबूत होगा।
इसके अलावा, ओवरसीज मोबिलिटी बिल में कानूनी कार्रवाई और दंड के प्रावधान भी शामिल होंगे। जो एजेंट या कंपनियां नियमों का उल्लंघन करेंगी, उनके खिलाफ वित्तीय जुर्माने, लाइसेंस रद्द करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था भारतीय नागरिकों के साथ धोखाधड़ी या अन्य अनैतिक काम न कर सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिल का मुख्य केंद्र डिजिटल निगरानी और ट्रैकिंग सिस्टम होगा। विदेश जाने वाले नागरिकों की जानकारी, उनके रोजगार विवरण और एजेंट के रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखा जाएगा। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करेगी।
इस नई पहल के तहत विदेश में नौकरी की प्रक्रिया अब अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और न्यायसंगत होगी। युवाओं और नौकरी चाहने वाले लोगों को पता होगा कि वे किस एजेंट के माध्यम से विदेश जा रहे हैं, उनके रोजगार की शर्तें क्या हैं और यदि कोई समस्या आती है तो वे किस माध्यम से मदद ले सकते हैं।
ओवरसीज मोबिलिटी (सुविधा और कल्याण) बिल, 2025 भारतीय युवाओं के लिए विदेश रोजगार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होने वाला है। यह न केवल फर्जीवाड़ों को रोकेगा, बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करेगा, जिससे देश में विदेश रोजगार की प्रक्रिया अधिक संरक्षित और भरोसेमंद बनेगी।








