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भारत ने IUCN विश्व संरक्षण सम्मेलन 2025 में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपना राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप (National Red List Roadmap) लॉन्च कर दिया है। यह पहल देश में वनस्पतियों और जीवों की जैव विविधता के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और खतरे के आकलन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इस विजन दस्तावेज का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में पाए जाने वाले प्रत्येक प्रजाति का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके और उनके संरक्षण के लिए ठोस रणनीति बनाई जा सके।
यह राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के सहयोग से तैयार किया गया है। IUCN विश्व स्तर पर उन जीवों और पौधों की सूची बनाता है जो विलुप्ति के कगार पर हैं या खतरे में हैं। अब भारत ने इस वैश्विक पहल को अपने राष्ट्रीय स्तर पर अपनाते हुए एक “इंडियन रेड लिस्ट” तैयार करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी इस रोडमैप में देश की जैव विविधता की सटीक पहचान, मॉनिटरिंग, और संरक्षण के लिए नीति आधारित ढांचा तैयार किया गया है। इसमें वनस्पतियों, पक्षियों, स्तनधारियों, कीटों, सरीसृपों और समुद्री जीवों सहित सभी प्रजातियों के वैज्ञानिक आकलन की योजना बनाई गई है।
भारत, जो दुनिया के 17 मेगा-बायोडायवर्स देशों में शामिल है, वहां करीब 1,00,000 से अधिक ज्ञात प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कई स्थानिक (endemic) प्रजातियां भी शामिल हैं। इन प्रजातियों पर बढ़ते शहरीकरण, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और अवैध शिकार जैसे खतरों के बीच, यह रोडमैप एक प्रणालीगत संरक्षण दृष्टिकोण को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
इस रोडमैप का एक मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर रेड लिस्ट मूल्यांकन केंद्र (National Red List Assessment Centre) की स्थापना करना है। यह केंद्र जैव विविधता के अध्ययन के लिए वैज्ञानिक डेटा एकत्र करेगा, प्रजातियों के संरक्षण की प्राथमिकताएं तय करेगा और विभिन्न राज्यों के पर्यावरण विभागों के साथ तालमेल बिठाकर कार्य करेगा।
पर्यावरण मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि “यह पहल केवल एक नीति दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक ठोस रोडमैप है। आने वाले वर्षों में हम प्रत्येक प्रजाति के लिए खतरे का मूल्यांकन करेंगे और उनके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।”
इस दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारत अपनी पारंपरिक पारिस्थितिकीय जानकारी और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों को मिलाकर एक एकीकृत जैव विविधता डेटाबेस तैयार करेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली प्रजातियों की स्थिति का भी सटीक आकलन हो सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल भारत को न केवल वैश्विक जैव विविधता संरक्षण प्रयासों में एक अग्रणी भूमिका दिलाएगी, बल्कि यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने में भी सहायक सिद्ध होगी। खासकर SDG-15, जो ‘स्थलीय जीवन के संरक्षण’ से जुड़ा है, इस रोडमैप से सीधे प्रभावित होगा।
इसके साथ ही भारत सरकार इस पहल के तहत राज्य जैव विविधता बोर्डों और स्थानीय निकायों को भी सशक्त बनाने की दिशा में काम करेगी ताकि संरक्षण कार्य सिर्फ नीति स्तर पर न रहकर ग्राउंड लेवल पर लागू हो सके। यह रेड लिस्ट रोडमैप भारत की पारंपरिक “मानव और प्रकृति के सहअस्तित्व” की भावना को भी दर्शाता है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि इस कदम से भारत में संरक्षण से जुड़ी नीतियां और भी अधिक प्रभावी बनेंगी। फिलहाल भारत में केवल कुछ ही प्रजातियों का रेड लिस्ट मूल्यांकन किया गया है, लेकिन इस नई योजना से आने वाले वर्षों में हजारों प्रजातियों की स्थिति का वैज्ञानिक और सांख्यिकीय आकलन संभव होगा।
देश के विभिन्न हिस्सों में पहले से चल रहे टाइगर कंजर्वेशन प्रोग्राम, एलिफेंट प्रोजेक्ट, और बायोस्फीयर रिजर्व मिशन जैसे प्रयासों के साथ यह नई पहल एक राष्ट्रीय स्तर की समग्र संरक्षण नीति का निर्माण करेगी। इससे न केवल वन्यजीवों और पौधों का संरक्षण होगा बल्कि यह स्थानीय समुदायों को भी संरक्षण प्रयासों में शामिल करने में मदद करेगी।
भारत के इस कदम का वैश्विक स्तर पर स्वागत किया जा रहा है। IUCN ने इसे “उदाहरण प्रस्तुत करने वाली पहल” बताया है, जो अन्य देशों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में जब भारत की राष्ट्रीय रेड लिस्ट तैयार होगी, तो यह न केवल वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी, बल्कि यह नीति निर्माताओं को साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में भी मदद करेगी।
भारत का यह रेड लिस्ट रोडमैप एक ऐसा दस्तावेज है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में नया अध्याय खोलेगा। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत अब केवल आर्थिक विकास पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और प्रकृति के संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है।








