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भारतीय शेयर बाजार ने 10 अक्टूबर 2025 को सकारात्मक नोट के साथ शुरुआत की, लेकिन वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए नए टैरिफ के असर ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 ने 25,200 अंक के स्तर को पार किया, जबकि बीएसई सेंसेक्स 82,200 के करीब कारोबार करता नजर आया। हालांकि, मध्य सत्र में बाजार में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे दोनों प्रमुख सूचकांकों में हल्की गिरावट दर्ज हुई।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों (FPI) की वापसी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सपोर्ट दिया, लेकिन वैश्विक कारकों ने अस्थिरता को बढ़ाया। अमेरिका की ओर से चीन और भारत पर नई टैरिफ नीति के ऐलान ने एशियाई बाजारों में दबाव बढ़ाया। इसके चलते भारतीय निवेशक भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय निर्यात पर 50% तक के टैरिफ की घोषणा की है। इस कदम से करीब 50 अरब डॉलर के व्यापार पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हाल ही में हुई बातचीत में दोनों पक्षों ने व्यापार वार्ता में “अच्छी प्रगति” का संकेत दिया है। इससे बाजार में उम्मीद जगी है कि आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है।
विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के इस निर्णय से दक्षिण एशिया की आर्थिक वृद्धि दर पर हल्का प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन भारत की मजबूत घरेलू मांग और बढ़ते निवेश प्रवाह इसे संतुलित कर सकते हैं। इसी वजह से भारतीय बाजार अभी भी अन्य एशियाई देशों की तुलना में अधिक स्थिर बने हुए हैं।
कंपनियों के नतीजों से उम्मीदें बढ़ीं
आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) ने अपने तिमाही नतीजे जारी करते हुए स्थिर राजस्व वृद्धि दिखाई है। हालांकि, वेतन वृद्धि और कर्मचारियों की लागत ने लाभांश पर थोड़ा असर डाला है। कंपनी के मजबूत प्रदर्शन ने आईटी शेयरों में तेजी लाई और सेंसेक्स को शुरुआती बढ़त दिलाई।
इसके अलावा, LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया की 1.3 अरब डॉलर की IPO को रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन मिला, जो पिछले दो दशकों में सबसे अधिक बोली लगी IPO बनी। इसने निवेशकों में सकारात्मक माहौल बनाया और बाजार में उत्साह लौटाया।
वैश्विक बाजारों का मिला-जुला संकेत
एशियाई बाजारों में आज सुबह कमजोर रुझान देखने को मिला। जापान का निक्केई इंडेक्स और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। वहीं, अमेरिकी बाजारों में कल रात डॉव जोन्स और नैस्डैक में उतार-चढ़ाव भरा सत्र देखने को मिला।
यूरोपीय बाजारों में भी निवेशक अमेरिकी टैरिफ और ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंतित नजर आए। कच्चे तेल की कीमतों में मामूली स्थिरता रही, लेकिन डॉलर की मजबूती ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए दबाव बढ़ाया।
तकनीकी नजर से बाजार की स्थिति
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी 50 के लिए 25,000–24,900 का स्तर मजबूत समर्थन के रूप में काम कर सकता है, जबकि 25,250 और 25,350 के स्तर अगले प्रतिरोध स्तर होंगे। यदि निफ्टी 25,250 को पार कर लेता है, तो बाजार में एक नई तेजी की लहर देखने को मिल सकती है।
वहीं, सेंसेक्स के लिए 82,000 का स्तर मनोवैज्ञानिक सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है। बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयरों में मजबूती जारी रहने से बाजार की नींव मजबूत दिख रही है।
एफपीआई की वापसी से बाजार को सहारा
पिछले कुछ सत्रों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) फिर से भारतीय बाजारों में लौट रहे हैं। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में एफपीआई ने करीब 4,000 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) भी बाजार में सक्रिय हैं।
यह पूंजी प्रवाह बाजार को मजबूती दे रहा है, हालांकि वैश्विक अस्थिरता के चलते निवेशकों को सतर्क रहना होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय भरोसा बरकरार
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को “वैश्विक वृद्धि इंजन” बताया है। संस्था का मानना है कि अमेरिका की टैरिफ नीति का भारत की अर्थव्यवस्था पर सीमित असर होगा। आईएमएफ के अनुसार, भारत की मजबूत उपभोक्ता मांग, निरंतर निवेश और तकनीकी क्षेत्र में वृद्धि इसकी आर्थिक नींव को सुदृढ़ बना रहे हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
वर्तमान परिस्थिति में निवेशकों को मुनाफावसूली के दबाव से बचते हुए लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए। बाजार में अस्थिरता के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति और कॉर्पोरेट परिणाम मजबूत हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, बैंकिंग, आईटी, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेशकों के लिए दीर्घकालिक अवसर मौजूद हैं।
10 अक्टूबर 2025 का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। जहां एक ओर घरेलू संकेतक सकारात्मक हैं, वहीं अमेरिकी टैरिफ नीति और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। निफ्टी और सेंसेक्स ने मजबूती दिखाई है, लेकिन आगे की दिशा वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेश प्रवाह और आगामी तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी।








