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  • गाज़ा में इज़राइली गोलीबारी: संघर्ष विराम के बावजूद छह फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत

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    मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, जब इज़राइली सेना ने गाज़ा पट्टी के उत्तरी क्षेत्र में संदिग्धों पर गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम छह फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब इज़राइल और हमास के बीच संघर्षविराम (ceasefire) लागू था, जिसे हाल ही में एक मानवीय कदम के रूप में घोषित किया गया था।

    इज़राइली सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, गाज़ा की सीमा के पास कुछ “संदिग्ध लोग” इज़राइली सैनिकों के करीब पहुंचे, जिससे “सीमा सुरक्षा” को खतरा उत्पन्न हुआ। सेना ने दावा किया कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोलीबारी की और “एक खतरे को निष्क्रिय किया”।

    वहीं, गाज़ा की स्वास्थ्य एजेंसियों ने बताया कि यह गोलीबारी दो अलग-अलग घटनाओं में हुई और कम से कम छह फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हुई, जिनमें दो किशोर भी शामिल थे। अन्य कई लोग घायल भी हुए हैं।

    यह घटना उस समय हुई जब इज़राइल और हमास के बीच एक संघर्षविराम समझौता लागू था, जिसे 19 जनवरी 2025 से प्रभावी किया गया था। इस समझौते का उद्देश्य युद्ध से जर्जर गाज़ा में शांति बहाल करना और मानवीय सहायता पहुंचाना था।

    युद्धविराम के तहत:

    • हमास ने बंदियों की रिहाई की।

    • इज़राइल ने फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ा।

    • गाज़ा में खाद्य और दवा भेजने की अनुमति दी गई।

    लेकिन अब इस घटना ने इस युद्धविराम की वैधता और गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    घटना के बाद गाज़ा के नागरिकों और स्थानीय संगठनों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों ने आरोप लगाया कि इज़राइल जानबूझकर संघर्षविराम का उल्लंघन कर रहा है और फिलिस्तीनी जनता को निशाना बना रहा है।

    स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अह्मद यूसुफ ने कहा:

    “जब संघर्षविराम के दौरान भी हमारे बच्चों की लाशें गिर रही हैं, तो यह शांति नहीं, एक दिखावा है।”

    इज़राइल का कहना है कि उसने केवल सुरक्षा खतरे को टालने के लिए कार्रवाई की। इज़राइली सेना के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा:

    “हम गाज़ा से किसी भी तरह के घुसपैठ या हमला सहन नहीं करेंगे। यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी।”

    हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मारे गए लोगों के पास कोई हथियार था या नहीं।

    संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, और मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना पर चिंता जताई है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन “ह्यूमन राइट्स वॉच” ने कहा:

    “गाज़ा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में इस तरह की गोलीबारी, विशेष रूप से संघर्षविराम के दौरान, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकती है।”

    संयुक्त राष्ट्र ने घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

    गाज़ा पहले से ही भोजन, जल, बिजली और दवाओं की भारी कमी से जूझ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार:

    • गाज़ा की 80% से अधिक आबादी को मानवीय सहायता की आवश्यकता है।

    • 60% बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं।

    इस घटना के बाद राहत वितरण पर भी असर पड़ सकता है।

    गाज़ा में हालिया हिंसा ने फिर यह साबित कर दिया है कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति की राह बेहद कठिन है। इज़राइल और हमास के बीच बना संघर्षविराम अभी भी नाजुक स्थिति में है। इस गोलीबारी ने न केवल संघर्षविराम की विश्वसनीयता को सवालों के घेरे में ला दिया है, बल्कि गाज़ा की आम जनता की सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

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