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  • Success Story: ₹15,000 से शुरू किया सफर और पहुंच गए ₹74 करोड़ तक — किसान के बेटे की अनोखी सफलता की कहानी

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    अहमदाबाद: कहते हैं, अगर इरादे मजबूत हों तो सीमित साधन भी बड़ी सफलता का आधार बन जाते हैं। इस कहावत को सच साबित किया है गुजरात के रहने वाले कुलदीप सोरथिया ने। एक किसान परिवार में जन्मे कुलदीप कभी कर्ज़ में डूबे पिता की मुश्किलें देखकर परेशान रहते थे, लेकिन आज वही कुलदीप एक सफल उद्यमी बनकर न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल चुके हैं बल्कि सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार का साधन भी बन गए हैं।

    कुलदीप सोरथिया ने सिर्फ ₹15,000 की मामूली पूंजी से अपने बिजनेस की शुरुआत की थी। आज उनकी कंपनी की वैल्यूएशन ₹74 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। वह एक सोलर एनर्जी स्टार्टअप कंपनी के संस्थापक हैं जो ग्रामीण और शहरी इलाकों में सोलर पैनल इंस्टॉलेशन और रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस प्रदान करती है।

    कुलदीप का बचपन संघर्षों से भरा था। उनके पिता एक छोटे किसान थे जिनकी आमदनी खेती के मौसम पर निर्भर रहती थी। कई बार फसलों के खराब होने पर उन्हें कर्ज़ लेना पड़ता था। आर्थिक तंगी के बावजूद कुलदीप ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र में कुछ करने का सपना देखा।

    कॉलेज से निकलने के बाद कुलदीप ने एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की, लेकिन जल्द ही उन्होंने महसूस किया कि नौकरी उनके सपनों को पूरा नहीं कर सकती। उन्होंने जोखिम उठाने का फैसला किया और अपनी सेविंग्स से ₹15,000 निकालकर एक छोटा सा सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने गांवों में जाकर लोगों को सोलर एनर्जी के फायदे समझाने का काम किया। कई बार उन्हें ताने भी सुनने पड़े, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

    धीरे-धीरे उनका काम लोगों तक पहुंचने लगा। पहले उन्होंने कुछ किसानों के खेतों में सोलर पंप लगवाए, जिससे उनकी फसल लागत में कमी आई और बिजली की निर्भरता घटी। उनके काम की चर्चा फैलने लगी और जल्द ही सरकारी योजनाओं के तहत उन्हें कई प्रोजेक्ट मिलने लगे।

    कुलदीप की कंपनी ने कुछ ही सालों में बड़ा विस्तार किया। आज उनकी सोलर एनर्जी फर्म गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में काम कर रही है। उनकी कंपनी ने अब तक 5,000 से अधिक सोलर प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। उनके अनुसार, “हमारा लक्ष्य सिर्फ बिजनेस करना नहीं, बल्कि गांव-गांव तक सौर ऊर्जा पहुंचाना है ताकि हर घर रोशन हो सके।”

    कुलदीप सोरथिया की यह यात्रा आसान नहीं थी। शुरुआत के दिनों में उन्हें निवेशकों की कमी, तकनीकी चुनौतियों और स्थानीय लोगों के अविश्वास से जूझना पड़ा। लेकिन उन्होंने हर असफलता से कुछ नया सीखा और अपने काम में सुधार किया। उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया और लोकल इवेंट्स का इस्तेमाल करके अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाया।

    उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज कुलदीप की कंपनी में 150 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं और वे हर साल करोड़ों रुपये का टर्नओवर कर रहे हैं। हाल ही में उन्हें राज्य सरकार द्वारा “गुजरात एनर्जी इनोवेशन अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया है।

    कुलदीप का मानना है कि सच्ची सफलता वही है जो समाज में बदलाव लाए। वह अपने गांव के युवाओं को प्रेरित करते हैं कि वे भी नई सोच और साहस के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने अपने गृह जिले में एक टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर भी शुरू किया है, जहां ग्रामीण युवाओं को सोलर टेक्नोलॉजी और इंस्टॉलेशन की ट्रेनिंग दी जाती है।

    उनका कहना है, “जब मैंने शुरुआत की थी, तब लोग मुझे कहते थे कि इतनी छोटी पूंजी से कोई बड़ा काम नहीं हो सकता। लेकिन मैंने सीखा कि असली पूंजी हमारे विचार और मेहनत होती है। अगर मन में लगन हो तो 15 हजार भी 74 करोड़ बन सकते हैं।”

    कुलदीप की सफलता की यह कहानी सिर्फ एक बिजनेस स्टोरी नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने दिखाया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि कोई व्यक्ति सही दिशा में मेहनत करे तो असंभव भी संभव हो सकता है।

    आज कुलदीप सोरथिया न केवल एक सफल उद्यमी हैं बल्कि नए भारत के उन युवाओं में से एक हैं जो आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में देश को आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी यह यात्रा हर उस युवा के लिए उदाहरण है जो अपने सपनों को साकार करने की राह पर पहला कदम बढ़ाने से डरता है।

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