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  • स्मृति मंधाना की जीत से गूंजा भारत, वर्ल्ड कप में छोड़ा विराट कोहली को भी पीछे

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    भारत की वुमेन्स क्रिकेट टीम ने आखिरकार वो कर दिखाया, जिसका इंतजार करोड़ों भारतीय कर रहे थे — महिला वर्ल्ड कप का खिताब। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे जिस खिलाड़ी का बल्ला सबसे ज्यादा बोला, वह थीं स्मृति मंधाना — टीम इंडिया की “मैंडी”, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से दुनिया को हैरान कर दिया।

    स्मृति मंधाना की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। महाराष्ट्र के सांगली की गलियों से निकलकर वर्ल्ड चैंपियन बनने तक का उनका सफर संघर्ष, जुनून और समर्पण की मिसाल है। उन्होंने क्रिकेट खेलने की प्रेरणा अपने भाई की एक अखबार की कटिंग देखकर ली थी।

    दरअसल, उनके बड़े भाई श्रीनिवास मंधाना क्रिकेट खेलते थे। एक दिन जब उन्होंने अखबार में अपने भाई की तस्वीर देखी, तो उन्होंने ठान लिया कि एक दिन उनका नाम भी सुर्खियों में होगा। और वहीं से शुरू हुआ ‘स्मृति मंधाना’ नाम का क्रिकेट सफर, जो अब भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो चुका है।

    वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में स्मृति ने शानदार शतक जड़ा, जिसने भारत की जीत की नींव रख दी। उनके बल्लेबाजी की क्लास देखकर क्रिकेट प्रेमी ही नहीं, बल्कि पूर्व दिग्गज भी दंग रह गए। उन्होंने ऐसी पारी खेली कि स्टेडियम में मौजूद दर्शक बार-बार “मंधाना… मंधाना…” के नारे लगाने लगे।

    स्मृति के क्रिकेट करियर की खास बात यह है कि उन्होंने कम उम्र में ही बड़ा मुकाम हासिल कर लिया। केवल 16 साल की उम्र में भारत के लिए डेब्यू करने वाली इस खिलाड़ी ने शुरुआत से ही अपने दमदार स्ट्रोक्स से सबका ध्यान खींचा। बाएं हाथ से खेलने वाली स्मृति को उनकी टाइमिंग, तकनीक और शॉट सिलेक्शन के कारण “वुमन विराट कोहली” कहा जाने लगा।

    फाइनल में उन्होंने न सिर्फ विपक्षी गेंदबाजों की नींद उड़ा दी, बल्कि रन चेज के दौरान जो संयम दिखाया, वह किसी अनुभवी खिलाड़ी जैसा था। क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने माना कि इस फाइनल में स्मृति का प्रदर्शन विराट कोहली के कई वर्ल्ड कप प्रदर्शनों से भी आगे निकल गया।

    स्मृति ने मैच के बाद मीडिया से कहा — “यह जीत सिर्फ टीम की नहीं, बल्कि हर उस लड़की की जीत है जो सपना देखने की हिम्मत रखती है। मैंने भाई की एक छोटी सी न्यूज कटिंग से प्रेरणा ली थी और आज उस प्रेरणा ने मुझे दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंचा दिया।”

    उनकी इस बात ने लाखों लड़कियों को प्रेरित कर दिया। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “India’s Real Queen of Cricket” कहकर सलाम कर रहे हैं। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #SmritiMandhana और #QueenMandy ट्रेंड करने लगे।

    उनके कोच ने बताया कि स्मृति हमेशा मैदान पर और मैदान के बाहर बेहद अनुशासित रहीं। जब दूसरे खिलाड़ी आराम करते थे, वह नेट्स में अतिरिक्त प्रैक्टिस करती थीं। उनका मानना था कि मेहनत ही एकमात्र रास्ता है जो सपनों को हकीकत बनाता है।

    मंधाना की इस सफलता में उनके परिवार का भी बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता, जो खुद एक क्रिकेट क्लब चलाते हैं, ने हमेशा बेटी को प्रोत्साहित किया। वहीं, मां ने उनके हर टूर्नामेंट में उनका साथ दिया। स्मृति ने कहा, “मां ने मेरे लिए जो त्याग किया है, वह मैं कभी नहीं भूल सकती। अगर मैं वर्ल्ड कप जीत सकी, तो उसमें उनका सबसे बड़ा योगदान है।”

    आज स्मृति मंधाना सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की प्रतीक बन चुकी हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर जुनून और आत्मविश्वास हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।

    वर्ल्ड कप जीतने के बाद प्रधानमंत्री से लेकर बॉलीवुड सितारों तक ने स्मृति और टीम इंडिया को बधाई दी। विराट कोहली ने ट्वीट किया — “स्मृति का खेल अद्भुत था। वह भारत की नई प्रेरणा हैं।”

    स्मृति मंधाना की कहानी हमें सिखाती है कि सफलता उन लोगों को मिलती है जो छोटी प्रेरणाओं को बड़ी उड़ान में बदलना जानते हैं।

    आज जब भारत का नाम क्रिकेट की दुनिया में ऊंचा हुआ है, तो उसमें स्मृति मंधाना का योगदान किसी “आधुनिक युग की झांसी की रानी” से कम नहीं। उन्होंने साबित कर दिया कि क्रिकेट सिर्फ पुरुषों का खेल नहीं — बेटियाँ भी बल्ले से इतिहास लिख सकती हैं।

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