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  • “जब तक कर्ज माफी नहीं, तब तक महायुति को वोट न दें” — मराठवाड़ा में गरजे उद्धव ठाकरे, फडणवीस और शिंदे ने दिया करारा जवाब

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    महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट लौट आई है। स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा के बाद मराठवाड़ा क्षेत्र में सियासी पारा चढ़ गया है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को मराठवाड़ा के दौरे के दौरान महायुति सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने किसानों से अपील की कि जब तक उनके कर्ज माफ नहीं किए जाते, तब तक वे महालुति (भाजपा-शिंदे गठबंधन) को वोट न दें।

    उद्धव ठाकरे ने कहा — “महाराष्ट्र के किसान आज सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। सूखा, फसल नुकसान और बढ़ते कर्ज के बोझ ने किसानों की कमर तोड़ दी है। सरकार ने बार-बार कर्जमाफी का वादा किया, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। मैं किसानों से कहना चाहता हूं कि जब तक आपकी कर्जमाफी नहीं होती, तब तक इस सरकार को वोट मत दो। यह सरकार सिर्फ फोटो खिंचवाने और भाषण देने में व्यस्त है।”

    उन्होंने आगे कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब किसानों के लिए कई राहत योजनाएं शुरू की गई थीं, लेकिन वर्तमान सरकार ने उन्हें बंद कर दिया। उद्धव ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर हमला बोलते हुए कहा कि “ये लोग सत्ता में आने के बाद जनता को भूल गए हैं। अब चुनाव आया तो फिर किसानों की याद आ रही है।”

    मराठवाड़ा में उद्धव ठाकरे की यह सभा हजारों की भीड़ से भरी रही। मंच से बोलते हुए उन्होंने महायुति सरकार को “जनविरोधी” बताया और कहा कि “यह सरकार किसानों की नहीं, ठेकेदारों की है। गरीबों के मुद्दे पर इनके पास कोई जवाब नहीं है। किसानों की आत्महत्या बढ़ रही है, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।”

    उद्धव ठाकरे के इस बयान पर महायुति की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उद्धव ठाकरे अब “झूठे वादों” के सहारे राजनीति कर रहे हैं। शिंदे ने कहा — “जो खुद अपने मुख्यमंत्री रहते हुए किसानों के लिए कुछ नहीं कर पाए, आज वही हमें सीख दे रहे हैं। हमारी सरकार ने अब तक लाखों किसानों को राहत दी है और नई योजनाएं लागू की हैं। उद्धव जी सिर्फ भाषण दे सकते हैं, काम नहीं।”

    वहीं, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव के बयान को “राजनीतिक हताशा” बताया। उन्होंने कहा कि “उद्धव ठाकरे आज भी उसी कुर्सी के लिए बेचैन हैं जिसे उन्होंने खुद छोड़ा था। किसानों के नाम पर राजनीति करना उनकी पुरानी आदत है। हमारी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए निरंतर काम कर रही है — चाहे वह फसल बीमा हो, जल प्रबंधन हो या पीएम किसान योजना का लाभ पहुंचाना।”

    फडणवीस ने आगे कहा कि महाराष्ट्र की जनता अब “भावनाओं नहीं, विकास” पर वोट देगी। उन्होंने दावा किया कि मराठवाड़ा समेत पूरे राज्य में महायुति की नीतियों से जनता संतुष्ट है और निकाय चुनावों में इसका असर दिखेगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उद्धव ठाकरे का यह मराठवाड़ा दौरा आगामी निकाय चुनावों से पहले शिवसेना (UBT) के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। मराठवाड़ा परंपरागत रूप से शिवसेना का गढ़ रहा है, लेकिन पिछले दो वर्षों में पार्टी में विभाजन और संगठनात्मक कमजोरियों के कारण समर्थन आधार में गिरावट देखी गई है। उद्धव अब इस क्षेत्र में फिर से अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

    किसानों से सीधा जुड़ाव बनाकर उद्धव ठाकरे एक बार फिर ग्रामीण महाराष्ट्र की राजनीति को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, महायुति भी इस आरोप का जवाब योजनाओं और विकास कार्यों के आंकड़ों से देने में जुट गई है।

    मराठवाड़ा का यह चुनावी माहौल अब पूरी तरह से “भावना बनाम प्रदर्शन” की लड़ाई बन चुका है। एक ओर उद्धव ठाकरे किसानों की भावनाओं पर दांव लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर शिंदे-फडणवीस जोड़ी अपने शासनकाल के कामों के जरिए जनता को साधने की कोशिश कर रही है।

    राजनीतिक माहौल को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सियासत और अधिक गरमाने वाली है। उद्धव ठाकरे के “कर्ज माफी तक वोट मत दो” वाले बयान ने महायुति के लिए मुश्किलें जरूर बढ़ा दी हैं, वहीं विपक्ष के लिए यह जनभावना जगाने का नया अवसर बन गया है।

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