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पंजाब में पराली जलाने की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग लगातार अभियान चला रहा है। इसी क्रम में मुख्य कृषि अधिकारी स्रीमती हरप्रीत पाल कौर ने सोमवार को फाजिल्का जिले के कई गांवों — नुकेरियां, पाली वाला, चक्क पाली वाला, कुंडल, खैरपुर और सीतो गुन्नो — का दौरा किया। उन्होंने किसानों को पराली प्रबंधन के महत्व के बारे में जागरूक किया और उन्हें यह संदेश दिया कि “पराली को आग नहीं, जमीन में मिलाएं”।

मुख्य कृषि अधिकारी ने किसानों से कहा कि पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है बल्कि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर भी गहरा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद आवश्यक पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की गुणवत्ता घटती है और भविष्य में फसल की पैदावार पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
हरप्रीत पाल कौर ने किसानों को समझाते हुए कहा कि विभाग की ओर से पराली प्रबंधन के लिए कई आधुनिक मशीनें सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, रोटावेटर और स्ट्रॉ मल्चर जैसी मशीनें शामिल हैं। इनका उपयोग करने से किसान पराली को जलाने की बजाय उसे मिट्टी में मिलाकर खाद में परिवर्तित कर सकते हैं।
उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार का उद्देश्य किसानों की आय को बढ़ाना है, इसलिए किसी भी किसान को पराली प्रबंधन के उपकरणों की कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा,
“हमारा लक्ष्य है कि फाजिल्का जिला पराली मुक्त बने और किसान पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाएं।”
मुख्य कृषि अधिकारी ने अपने दौरे के दौरान गांव कुंडल के किसान लाभ सिंह के खेत में जाकर 10 एकड़ भूमि पर सुपर सीडर मशीन से गेहूं की बुवाई का प्रदर्शन भी किया। इस मौके पर उन्होंने किसानों को बताया कि यह तकनीक न केवल पराली के निपटारे का बेहतर तरीका है बल्कि इससे खेत की नमी भी बरकरार रहती है और अतिरिक्त खाद की आवश्यकता नहीं पड़ती।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने से जो धुआं निकलता है, वह सिर्फ हवा को नहीं बल्कि इंसान और जानवरों दोनों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। इससे सांस से जुड़ी बीमारियां, आंखों में जलन और फेफड़ों की समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि “पर्यावरण रक्षक” भी बन सकते हैं।
हरप्रीत पाल कौर ने किसानों को विभाग की विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार किसानों को 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी पर पराली प्रबंधन मशीनें उपलब्ध करा रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस सुविधा का लाभ उठाकर पराली जलाने की परंपरा को समाप्त करें।
उन्होंने यह भी कहा कि किसान यदि पराली को खेत में मिलाते हैं तो अगले मौसम में उनकी मिट्टी में प्राकृतिक जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ेगी, जिससे फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों में सुधार होगा। उन्होंने किसानों को उदाहरण देते हुए बताया कि जिन किसानों ने पराली प्रबंधन के नए तरीकों को अपनाया है, उनकी फसलों की पैदावार में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्य कृषि अधिकारी ने कहा कि विभाग गांव-गांव जाकर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करेगा ताकि हर किसान तक यह संदेश पहुंच सके कि पराली जलाना पर्यावरण के लिए हानिकारक है और इसका विकल्प वैज्ञानिक तरीके से संभव है।
कार्यक्रम के अंत में हरप्रीत पाल कौर ने किसानों से अपील करते हुए कहा,
“हमारी धरती मां हमें अन्न देती है, इसे जलाना हमारे लिए शर्म की बात है। पराली को जलाने की बजाय, इसे जमीन में मिलाकर धरती को और उपजाऊ बनाएं। यही सच्ची देशसेवा है।”
कुल मिलाकर, फाजिल्का जिले में चलाए जा रहे इस जागरूकता अभियान से किसानों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। अब उम्मीद की जा रही है कि इस प्रयास से पराली जलाने की घटनाओं में कमी आएगी और पंजाब स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ेगा।








