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भारतीय सिनेमा और थिएटर की दुनिया में एक ऐसा नाम है जो अभिनय, लेखन, संगीत और कविता — इन सभी विधाओं में समान रूप से दमदार उपस्थिति दर्ज कराता है — पीयूष मिश्रा। अपनी अनूठी आवाज़, तीखे शब्दों और मंच पर ऊर्जा से भरपूर परफॉर्मेंस के लिए पहचाने जाने वाले पीयूष मिश्रा इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। वे अपने प्रसिद्ध बैंड ‘बल्लीमारान’ के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के सहयोग से भारत के 15 शहरों में विशेष म्यूजिकल टूर ‘आरंभ 2.0’ लेकर आ रहे हैं।
पीयूष मिश्रा का कहना है कि संगीत उनके लिए केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन का एक विस्तार है। वे कहते हैं, “जब मैं मंच पर जाता हूं, तो मेरे भीतर का कवि, गायक और अभिनेता — तीनों एक साथ ज़िंदा हो जाते हैं। मैं चाहता हूं कि हर श्रोता मेरे गीतों को महसूस करे, न कि केवल सुने।”
‘आरंभ 2.0’ देश के युवाओं और संगीत प्रेमियों के लिए एक बार फिर से उस अद्भुत ऊर्जा को महसूस करने का मौका देगा, जिसने पीयूष मिश्रा को “कल्ट आइकन” का दर्जा दिया है। यह म्यूजिकल टूर दिल्ली, मुंबई, पुणे, जयपुर, भोपाल, हैदराबाद, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में आयोजित होगा।
पीयूष मिश्रा का बैंड ‘बल्लीमारान’ अपने अनूठे अंदाज़ में शायरी, रॉक और भारतीय लोकसंगीत का मेल करता है। बैंड के लोकप्रिय गीत जैसे “आरंभ है प्रचंड”, “हुस्न है सुहाना”, “एक बग़ल में चाँद होगा” और “फिर से जीने का मौसम आया” ने दर्शकों के दिलों में एक अलग जगह बनाई है। इस शो में बैंड इन गीतों को नए अंदाज़ और नई ऊर्जा के साथ प्रस्तुत करेगा।
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि उनके गीतों में इतनी गहराई और भावनाओं का स्रोत क्या है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं नशे में नहीं लिखता, मैं जुनून में लिखता हूं। जो शब्द दिल से निकलते हैं, वही लोगों के दिलों में उतरते हैं। नशा रचनात्मकता को नहीं, सिर्फ सोच को धुंधला करता है।”
उन्होंने आगे कहा कि उनके लिए हर शो एक ‘साधना’ की तरह है। “मैं हर बार मंच पर ऐसा परफॉर्म करता हूं कि दर्शक खुद कहें — मजा आ गया। मेरे लिए यह सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संवाद है। मैं अपने दर्शकों से दिल से जुड़ता हूं।”
थिएटर से लेकर सिनेमा तक, पीयूष मिश्रा ने अपने करियर में कई यादगार भूमिकाएँ निभाई हैं। ‘गुलाल’, ‘रॉकस्टार’, ‘तमाशा’, ‘पिंक’ और ‘मकबूल’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी कलात्मक प्रतिभा से सबको प्रभावित किया है। लेकिन उनका मानना है कि संगीत ही उन्हें सच्ची स्वतंत्रता देता है। “संगीत मेरे भीतर की बेचैनी को शांत करता है। यह मेरी आत्मा की भाषा है,” उन्होंने कहा।
‘आरंभ 2.0’ टूर का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और कला के प्रति सम्मान को बढ़ावा देना भी है। बैंड के सदस्यों ने बताया कि इस बार टूर में लाइव इंटरैक्शन सेशन्स, युवा कलाकारों के लिए ओपन माइक और स्थानीय संगीत प्रतिभाओं के साथ सहयोग भी होगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के एक अधिकारी ने बताया कि ‘आरंभ 2.0’ का मकसद भारत के हर शहर में “संगीत और शब्दों का संगम” पहुंचाना है। यह शो केवल एक कॉन्सर्ट नहीं, बल्कि एक अनुभव होगा जो लोगों को भीतर से झकझोर देगा।
पीयूष मिश्रा की शख्सियत का सबसे बड़ा आकर्षण उनकी सादगी और संवेदनशीलता है। वे कहते हैं, “मैं स्टार नहीं, कलाकार हूं। मेरी चाहत है कि लोग मुझे याद रखें मेरे शब्दों, मेरे सुरों और मेरे जुनून के लिए।”
‘आरंभ 2.0’ के साथ वे एक बार फिर यह साबित करने जा रहे हैं कि कला सिर्फ मंच पर नहीं होती — वह हर उस दिल में होती है जो उसे महसूस करता है। आने वाले महीनों में जब बल्लीमारान के सुर भारत के आसमान में गूंजेंगे, तब यह कहना गलत नहीं होगा कि पीयूष मिश्रा सिर्फ गा नहीं रहे — वे एक पीढ़ी के एहसास को जी रहे हैं।








