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नासिक शहर में पार्किंग तथा ट्रैफिक जाम की समस्या को काबू करने के लिए नासिक नगर निगम ने एक बार फिर कदम बढ़ाया है। नगर निगम ने शहर के 28 स्थानों पर “पे-एंड-पार्क” सुविधा के लिए तीसरी बार बोली‐प्रक्रिया (टेंडर) जारी की है। इस परियोजना को जनवरी 2026 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
28 चिह्नित स्थानों में 22 ऑन-स्ट्रीट और 6 ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग स्पॉट शामिल हैं, जो निगम के पश्चिमी डिविजन के केंद्रीय हिस्से में स्थित हैं। ये स्थान शहर के व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक व पार्किंग नियंत्रण के उपाय के रूप में चिन्हित किये गए हैं।
यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछली दो बार बोलियाँ फेल हुई थीं। पहली दो बार बोली निकलने के बावजूद अपेक्षित प्रतिस्पर्धा नहीं मिली थी—निगम को केवल एक ही प्रस्ताव मिला था जबकि नियमों के अनुसार कम-से-कम तीन प्रतिस्पर्धी बोलियाँ अनिवार्य थीं। इसलिए इस बार निगम ने बोली-शर्तों में बदलाव किया है और कहा है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो एक योग्य बोली को भी मंजूरी दी जाएगी।
निगम ने पहले निर्धारित अक्टूबर अंत तक इस सुविधा को चालू करने का लक्ष्य रखा था, पर काम लम्बित रहा। इसके पीछे मुख्य कारण था ठेकेदारों की अनिच्छा और बोली में भागीदारी का न्यून स्तर। पिछली बोली प्रक्रिया के दौरान ठेकेदारों ने मासिक रॉयल्टी शुल्क बहुत अधिक बताई थी, जिसके कारण प्रतिस्पर्धा कम हुई थी।
निगम ने उस समस्या को देखते हुए मासिक रॉयल्टी राशि में कटौती की है और शुल्क ढांचा नया बनाया है। उदाहरण के तौर पर, दोपहिया वाहनों के लिए पहले दो घंटे की पार्किंग शुल्क ₹10, अगले दो-छह घंटे के लिए ₹20 तय की गई है। वहीं, कार व चारपहिया वाहन के लिए शुरुआती दो घंटे का शुल्क ₹20 और दो-छह घंटे के लिए ₹40 निर्धारित हुआ है। नो-पार्किंग जोन के उल्लंघन पर जुर्माने व वाहन ट्रोइंग की व्यवस्था भी की गई है।
नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का प्राथमिक उद्देश्य राजस्व अर्जित करना नहीं बल्कि शहर की ट्रैफिक व पार्किंग की चुनौतियों से राहत देना है। उन्होंने कहा, “हमें ट्रैफिक जाम व सड़क किनारे गलत पार्किंग से राहत देना है, इसलिए इस बार प्रक्रिया को शीघ्रता से आगे बढ़ा रहे हैं।”
शहरवासियों ने इस पहल का स्वागत किया है। नासिक के व्यस्त मार्केट रोड, भरोली, गडूलीकान आदि इलाकों में लंबे समय से पार्किंग की कमी व अनुचित पार्किंग का दबाव बना हुआ था। कई लोगों ने निगम से जल्दी समाधान की मांग की थी। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू हो जाए, तो नासिक शहर में पै-एंड-पार्क मॉडल और व्यापक रूप से लागू होने की संभावना है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकार की सुविधा से न केवल पार्किंग व्यवस्था सुधरेगी बल्कि सड़क उपयोग व यातायात संचालन भी बेहतर हो सकेगा। हालांकि यदि इस बार भी बोली प्रक्रिया में बाधाएँ आती हैं या ठेकेदारों की भागीदारी कम होती है, तो निगम को योजनाओं में बदलाव करना पड़ेगा या सीधे संचालन मॉडल पर विचार करना होगा।
अब यह देखना बाकी है कि तीसरी बार निकाल गई बोली प्रक्रिया कितनी सफल होगी और नासिक नगर निगम अपने निर्धारित लक्ष्य जनवरी 2026 तक इसे क्रियान्वित कर पाएगी या नहीं। अगर सब कुछ योजना के अनुरूप हुआ, तो यह शहर के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी।







