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सरकारी दफ्तरों में अक्टूबर 2025 में आयोजित विशेष स्वच्छता अभियान ने न केवल कार्यालयों की सफाई सुनिश्चित की बल्कि सरकार की राजस्व वसूली में भी बड़ा योगदान दिया। इस अभियान के दौरान सरकार ने कबाड़ बेचकर 800 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की, जो इस राशि से लगभग सात वंदे भारत ट्रेनें खरीदी जा सकती हैं।
केंद्रीय कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस उपलब्धि को साझा करते हुए बताया कि इस अभियान से लगभग 233 लाख वर्ग फुट जगह खाली हुई। उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों में ऐसे विशेष अभियान चलाकर सरकार ने कुल 4,100 करोड़ रुपये कमाए हैं। यह राशि किसी बड़े अंतरिक्ष मिशन या कई चंद्रयान मिशनों के बजट के बराबर है।
उन्होंने आगे कहा, “इन अभियानों के दौरान सरकारी संस्थाओं और उनकी सहायक कंपनियों ने 923 लाख वर्ग फुट जगह खाली कराई है। इतनी जगह पर आसानी से कोई बड़ा मॉल, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट या अन्य सरकारी संस्थान स्थापित किया जा सकता है। यह अभियान न केवल सफाई के लिए बल्कि सरकारी संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए भी अहम है।”
सरकार ने 2021 में तय किया था कि हर साल 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में पुराने कबाड़, अप्रयुक्त फर्नीचर, पुराने उपकरण और गैरजरूरी दस्तावेजों को हटाकर कार्यालयों की जगह का सही उपयोग करना है।
इस अभियान के तहत केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और उनके सहायक संस्थाओं ने अपने कार्यालयों में जमा पुराने सामान को वर्गीकृत किया और जरूरत के अनुसार पुनर्चक्रण या बिक्री के लिए भेजा।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस अभियान के दौरान सरकारी विभागों में जमा पुराने फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कागजात और लोहे के कबाड़ को नीलामी के माध्यम से बेचा गया। इसके लिए सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार की कंपनियों से बोली लगाई गई।
स्वच्छता अभियान का लाभ केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय भी रहा। पुराने उपकरण और फर्नीचर का सही निपटान कर दिया गया, जिससे रीसाइक्लिंग के माध्यम से सामग्री का पुन: उपयोग हुआ। पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और धातु के कबाड़ को सही प्रक्रिया से निपटाना पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा।
मंत्री ने कहा कि “सरकारी दफ्तरों में जमा कबाड़ न केवल जगह घेरता था बल्कि समय के साथ यह संसाधनों की बर्बादी का कारण भी बनता था। इस अभियान से विभागों को आधुनिक और साफ-सुथरी जगह मिली है, वहीं सरकार को भी अच्छी आमदनी हुई।”
सरकार अब इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने की योजना बना रही है। अगले साल से स्वच्छता अभियान में डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन नीलामी प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव है। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और आमदनी में भी इजाफा होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल सरकारी कार्यकुशलता और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यदि इसी तरह के अभियान नियमित रूप से आयोजित होते रहें, तो न केवल सरकारी खर्च में कटौती होगी बल्कि आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
कबाड़ बेचकर 800 करोड़ रुपये कमाने वाली यह योजना यह साबित करती है कि छोटी‑छोटी सरकारी पहल भी बड़े पैमाने पर आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ दे सकती हैं। सरकार की यह योजना न केवल स्वच्छता और संगठनात्मक कुशलता को बढ़ावा देती है बल्कि देश के बुनियादी ढांचे और विकास योजनाओं के लिए भी संसाधन जुटाने में मददगार है।
यदि इसी तरह का प्रयास लगातार चलता रहा, तो भविष्य में सरकारी स्वच्छता अभियान सिर्फ सफाई का माध्यम नहीं, बल्कि राजस्व सृजन और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।







