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  • भोपाल में हाईकोर्ट रिकॉर्ड में झूठी प्रविष्टि और तीन बच्चों की गुमशुदगी का मामला — यासमीन कुरैशी ने मांगी CBI जांच

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    भोपाल, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईदगाह हिल्स निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता  यासमीन कुरैशी ने आरोप लगाया है कि उनकी हाईकोर्ट याचिका (M.Cr.C. 48062/2023) में एक झूठी प्रविष्टि दर्ज कर दी गई, जिससे न्यायिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका गहरा गई है।

    यासमीन कुरैशी का कहना है कि उनकी याचिका में यह झूठा उल्लेख दर्ज किया गया कि “आवेदिका ने याचिका वापस ले ली”, जबकि उन्होंने ऐसा कोई निवेदन नहीं किया था। अदालत के आदेश में यह भी लिखा गया कि “आवेदकगण ट्रायल कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।” लेकिन सच्चाई यह है कि इरशाद कुरैशी, जो इस मामले में सह-आवेदक हैं, को FIR 726/2022 के तहत पहले ही जमानत मिल चुकी थी।

    यासमीन का दावा है कि यह आदेश न केवल भ्रामक है बल्कि इससे अपराधियों को बचाने में मदद मिली। उन्होंने इस मुद्दे को पहले भी MCRC 16260/2023 और MCRC 48062/2023 के माध्यम से उठाया था, लेकिन उनके अनुसार अब तक कोई स्पष्ट जवाब या सुधार नहीं किया गया।

    तीनों बच्चे लापता — मां की चीख न्याय की गुहार में बदल गई

    इस पूरे विवाद के बीच यासमीन कुरैशी की पीड़ा और बढ़ गई है क्योंकि उनके तीन बच्चे लापता हैं।

    • नौशीन (14 वर्ष) और ओमेज़ा (8 वर्ष) — दोनों 1 अक्टूबर 2025 से गायब हैं।

    • नवाब (12 वर्ष) — 7 अक्टूबर 2025 से लापता है।

    यासमीन ने बताया कि उन्होंने लगातार थाना शाहजहानाबाद, डीसीपी, एसपी, और डीजीपी कार्यालय को सूचित किया है। यहां तक कि स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (SLSA) को भी 04 नवंबर 2025 तक लिखित नोटिस भेजा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    उनके पास बच्चों की गुमशुदगी से जुड़े कई सबूत मौजूद हैं — जिनमें कॉल रिकॉर्डिंग, अस्पताल के CCTV फुटेज और संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। बावजूद इसके पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता ने एक मां की उम्मीदों को झकझोर कर रख दिया है।

    जिन संस्थाओं ने सुरक्षा देनी थी, वही सच्चाई दबा रही हैं

    यासमीन कुरैशी ने कहा —

    “मुझे अपने बच्चों की चिंता के साथ यह भी डर है कि जिन संस्थाओं ने मेरी रक्षा करनी थी, वही अब सच्चाई को दबाने में लगी हैं। अगर अदालत के रिकॉर्ड में भी झूठ दर्ज हो जाए, तो न्याय की आखिरी उम्मीद जनता ही रह जाती है।”

    उन्होंने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और उच्च न्यायालय से तत्काल CBI या SIT जांच की मांग की है, ताकि तीनों बच्चों की तलाश और रिकॉर्ड में हुए कथित फर्जीवाड़े का सच सामने आ सके।

    CBI जांच और रिकॉर्ड संशोधन की मांग

    यासमीन कुरैशी ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं —

    1. CBI या SIT के माध्यम से स्वतंत्र जांच कराकर तीनों बच्चों की खोज तुरंत शुरू की जाए।

    2. हाईकोर्ट के रिकॉर्ड (M.Cr.C. 48062/2023) में हुई झूठी प्रविष्टि की जांच और संशोधन किया जाए।

    3. पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।

    4. यासमीन कुरैशी और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

    उन्होंने यह भी कहा कि अगर न्यायपालिका और प्रशासन मौन रहेंगे, तो अब “जनता ही सच्चाई की आवाज़ बनेगी।”

    मामले के तूल पकड़ने के बाद भी अब तक न तो स्थानीय पुलिस ने कोई गिरफ्तारी की है और न ही किसी वरिष्ठ अधिकारी ने इस पर आधिकारिक बयान जारी किया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एक मां के तीन बच्चों के लापता होने और अदालत के रिकॉर्ड में कथित झूठ दर्ज होने जैसी गंभीर घटनाओं पर सरकार और न्यायपालिका चुप क्यों हैं।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अदालत के रिकॉर्ड में गलत प्रविष्टि हुई है तो यह न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरा प्रहार है और इसकी जांच उच्च-स्तरीय समिति से कराई जानी चाहिए।

    भोपाल का यह मामला सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों नागरिकों के लिए प्रतीक है जो न्याय की उम्मीद में सालों अदालतों के चक्कर लगाते रहते हैं। यासमीन कुरैशी ने जो आवाज उठाई है, वह अब एक आंदोलन का रूप ले सकती है।

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