बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम घोषित होने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने महागठबंधन पर तीखा वार किया है। JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने उन नेताओं के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं, जिन्होंने पिछले चुनावी प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेहत और मानसिक क्षमता पर सवाल उठाए थे। नीरज कुमार का कहना है कि अब समय आ गया है कि उन निंदक नेताओं की “मानसिक जांच” करवाई जाए, और उनकी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
नीरज कुमार ने अपने बयान में कहा है कि जिन लोगों ने चुनाव से पहले नीतीश कुमार की तबीयत पर सवाल खड़े किए थे, उन्हें यह जानने का हक है कि उनकी मानसिकता कैसी है। यह सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह काम “ज़रूरी” है, क्योंकि यह दिखाता है कि कौन सिर्फ राजनीति कर रहा है और कौन वास्तव में लोगों की भावनाओं के साथ छेड़छाड़ कर रहा है।
JDU की इस प्रतिक्रिया का समय भी उसने रणनीतिक रूप से चुना है। बिहार के विधानसभा चुनाव के नतीजे 14 नवंबर को घोषित हुए, और उसी दिन नीरज कुमार का यह बयान चर्चा में आ गया। चुनाव परिणाम में एनडीए को 202 सीटें मिलकर ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है, और JDU इस जीत के बाद महागठबंधन पर अपने आरोपों को और तीखे ढंग से पेश कर रही है।
उन्होंने एक पोस्टर जारी कर महागठबंधन में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का मजाक उड़ाया, उनकी तुलना महाभारत के पात्रों से की। नीरज कुमार ने कहा कि जिन लोगों ने यह दावा किया था कि उनकी सरकार बिहार को बर्बाद कर देगी, लोकतंत्र को चुनौती देगी, वे अब चुप हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर जाति और धर्म के लोगों ने फिर से नीतीश कुमार पर अपना भरोसा जताया है, और JDU इस भरोसे को सम्मान देती है।
उमेश कुशवाहा, JDU के प्रदेश अध्यक्ष, ने भी इस मौके पर यह बात दोहराई कि जनता ने चुनाव में जदयू और नीतीश कुमार पर विश्वास जताया। उनका कहना है कि यह विश्वास केवल शब्दों का नहीं, बल्कि जनादेश का स्वरूप है। कोमल सिंह, JDU की एक अन्य वरिष्ठ नेता, ने भी पार्टी की जीत और जनता के समर्थन पर प्रसन्नता प्रकट की।
मीडियाई और राजनैतिक विश्लेषकों की नजर में, JDU का यह बयान महागठबंधन में गहराए मतभेदों और चुनाव हार के बाद उठती सियासी चुनौतियों को बढ़ाता दिखाता है। नीरज कुमार की मांग यह है कि अगर महागठबंधन के नेता लोगों की सेहत और नेतृत्व क्षमता को सवालों के घेरे में लाते हैं, तो उन्हें खुद भी जवाबदेह बनाया जाना चाहिए और उनकी मानसिक पात्रता का परीक्षण किया जाना चाहिए।
राजनीतिक माहौल में यह बयान एक बड़े राजनीतिक शोर का कारण बन सकता है। सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ चुनावी जीत का जश्न मना रहे JDU का हमला है, या वे वास्तव में विपक्ष कमज़ोर करने की रणनीति के हिस्से के रूप में इस तरह का बयान दे रहे हैं।
बिहार के इस राजनीतिक परिदृश्य में, नीतीश कुमार की लोकप्रियता और उनकी छवि सिर्फ राहत की नहीं — बल्कि रणनीति की जीत का केंद्र भी बन चुकी है। JDU का यह पलटवार इस बात की ओर इशारा करता है कि पार्टी न सिर्फ चुनाव जीतना चाहती है, बल्कि उसे यह संदेश भी देना चाहती है कि विपक्ष की उठाई गई हर समस्या को उसी ज़ोर से चुनौती दी जाएगी।








