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कोलकाता में खेले जा रहे भारत बनाम साउथ अफ्रीका टेस्ट मैच का दूसरा दिन टीम इंडिया के लिए बेहद चौंकाने वाला साबित हुआ। जिस टर्निंग पिच पर भारत अपने स्पिनरों के दम पर हावी होने का सपना देख रहा था, वही पिच भारतीय बल्लेबाजों के लिए पहेली बन गई। नतीजा यह हुआ कि भारत की पहली पारी मात्र 189 रन पर ढह गई और मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप एक बार फिर दबाव में टूटता नजर आया।
इससे पहले साउथ अफ्रीका की टीम 159 रनों पर सिमट गई थी। भारत को उम्मीद थी कि बल्लेबाज अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलेंगे और मैच पर अपनी पकड़ मजबूत करेंगे, लेकिन अफ्रीकी स्पिनरों ने परिस्थितियों का शानदार उपयोग करते हुए भारतीय बल्लेबाजों को जाल में फंसा लिया। भारत की 30 रनों की मामूली बढ़त बताती है कि बल्लेबाजी में कितना संघर्ष किया गया।
कोलकाता की पिच पहले दिन से ही धीमी, टर्निंग और लो बाउंस वाली दिखाई दे रही थी। पिच पर हर गेंद के साथ असमान उछाल और टर्न बढ़ता जा रहा था। यह वही तरह की सतह थी, जिस पर भारतीय स्पिनर विपक्षी टीम को बांधकर रखते हैं, लेकिन इस बार साउथ अफ्रीका के स्पिनरों ने अपनी योजनाओं के साथ बेहतर ढंग से परिस्थितियों का फायदा उठाया।
भारत की शुरुआत तो ठीक रही, लेकिन मध्यक्रम एक बार फिर ढह गया। ओपनर यशस्वी जायसवाल फेल हुए, जिसके बाद केएल राहुल ने 39 रनों की पारी खेलकर उम्मीद जगाई, लेकिन वह भी बड़ी पारी में नहीं बदल सके। वाशिंगटन सुंदर (29) और रवींद्र जडेजा (27) ने शुरुआत तो की, लेकिन दोनों ही अहम समय पर चूक गए। इन छोटी पारियों ने टीम को संभालने का मौका तो दिया, लेकिन मैच की स्थिति को नियंत्रित करने में यह नाकाफी रहीं।
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब कप्तान शुभमन गिल को गर्दन की ऐंठन के कारण रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। गिल अच्छे लय में नजर आ रहे थे और उनसे उम्मीद थी कि वह पारी को आगे ले जाएंगे, लेकिन उनका जाना बल्लेबाजी क्रम को और कमजोर कर गया। उनके हटने के बाद भारत का निचला क्रम भी दबाव में टूट गया और टीम 189 पर सिमट गई।
दूसरी ओर भारतीय गेंदबाजों ने पहले दिन शानदार प्रदर्शन किया था। जसप्रीत बुमराह ने अपनी घातक गेंदबाजी से 5 विकेट लेकर मैच में भारत को बढ़त दिलाई थी। लेकिन बल्लेबाजों की नाकामी से वह बढ़त ज्यादा असरदार साबित नहीं हुई।
मैच अब बेहद दिलचस्प स्थिति में पहुंच चुका है। पिच पर टर्न और उछाल लगातार बढ़ रहा है और तीसरे दिन बल्लेबाजी और मुश्किल होने की संभावना है। ऐसे में भारत को अपने स्पिनरों—जडेजा और अश्विन—से बड़ी उम्मीदें होंगी। लेकिन अगर बल्लेबाज दूसरी पारी में खुद को साबित नहीं कर पाए, तो कोलकाता टेस्ट भारत के लिए चुनौतीपूर्ण मोड़ ले सकता है।
टीम इंडिया की रणनीति और पिच के चयन पर भी सवाल उठने लगे हैं। घरेलू पिच की समझ के बावजूद बल्लेबाजों का इस तरह संघर्ष करना टीम के लिए चिंता का विषय है। कोलकाता की पिच पर अपना ही दांव टीम इंडिया पर भारी पड़ता दिख रहा है, और मैच का रुख अब भारतीय गेंदबाजों की अगली पारी की मेहनत पर निर्भर करेगा।
आने वाले दिन का खेल भारत के लिए निर्णायक साबित होगा—क्योंकि कोलकाता की यह पिच क्रिकेट का असली इम्तिहान लेने को तैयार है।







