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  • रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे हैं नीतीश कुमार: 20 नवंबर को गांधी मैदान में ‘200 पार’ में तीसरी जीत का भव्य जश्न

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    बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण पल आने वाला है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 20 नवंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह घटना उनकी राजनीतिक यात्रा की मज़बूत पकड़ और लंबे समय तक सत्ता में बने रहने की उनकी क्षमता का प्रतीक बन चुकी है। इस शपथ-ग्रहण समारोह को सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक जश्न के रूप में भी देखा जा रहा है — क्योंकि यह “200 पार” की उनकी तीसरी बड़ी जीत का प्रतीक है।

    गांधी मैदान न केवल पटना के लिए एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि नीतीश कुमार के लिए एक प्रिय मंच भी रहा है, जहां उन्होंने पहले भी अपनी कई शपथ-समारोह आयोजित किए हैं। इस बार समारोह की तैयारी बहुत बड़े पैमाने पर की जा रही है और आयोजन को भव्यता देने के लिए जिला प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व दोनों पूरी सक्रियता से जुटे हैं।

    उनकी वापसी सत्ता में NDA गठबंधन की स्पष्ट जनादेश का परिणाम है। इस बार की सरकार में JD(U), भाजपा (BJP), साथ ही कुछ छोटे सहयोगी दलों की भूमिका है, और ऐसे गठजोड़ ने नीतीश कुमार को बड़ी संख्या में समर्थन दिलाया है।

    समारोह के दौरान कई राष्ट्रीय नेता भी शामिल होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक शपथ-ग्रहण में मौजूद होंगे, जिससे समारोह की महत्वता और बढ़ जाएगी। अन्य NDA सहयोगी प्रमुख नेता भी समारोह में भाग लेने की योजना बना रहे हैं।

    समारोह की तैयारियों में प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और मंच सजावट पर विशेष फोकस किया है। गांधी मैदान को 17 नवंबर से 20 नवंबर तक आम जनता के प्रवेश के लिए बंद कर दिया गया है, ताकि आयोजन सुचारू और व्यवस्थित रूप से हो सके।

    नीतीश कुमार की यह जीत सिर्फ उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति में उनके और उनके दल के दीर्घकालिक प्रभाव और संगठनात्मक शक्ति की पुष्टि भी है। आलोचकों और समर्थकों दोनों के लिए यह पल महत्वपूर्ण है — समर्थकों के लिए यह विजय का जश्न है, जबकि विपक्षी दलों के लिए यह चुनौती का संकेत है कि बिहार में उनकी पकड़ मजबूत है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार ने समय-समय पर राजनीतिक गठबंधनों की रणनीति को बहुत चालाकी से इस्तेमाल किया है। उनकी यह रणनीति उन्हें सत्ता में वापस लाने में कामयाब रही है, और पिछले कई दशकों में उन्होंने बिहार में एक स्थिर नेतृत्व का चेहरा बनकर अपनी छवि को और मजबूत किया है।

    नीतीश कुमार की राजनीति में उनकी क्षमता सिर्फ जीत तक सीमित नहीं रही है — उन्होंने विकास, कानून-व्यवस्था और सामाजिक समन्वय पर भी ध्यान केंद्रित किया है। अब जब वे दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, तो जनता और विपक्ष दोनों की उम्मीदें और निगाहें उनके अगले कार्यकाल पर बनी हुई हैं।

    इस शपथ-समारोह के साथ, बिहार में एक नए अध्याय की शुरुआत होने की संभावना है। उनकी यह रिकॉर्ड पत्रिका में दर्ज की जाने वाली उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि बिहार की राजनीति और उसकी सामाजिक-राजनीतिक दिशा के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ बन सकती है।

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