बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने पूरे देश के राजनीतिक परिदृश्य को नए सिरे से हिला दिया है। एनडीए की ऐतिहासिक जीत और महागठबंधन की करारी हार ने न केवल बिहार की राजनीति, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस को तेज कर दिया है। इस हार के बाद कांग्रेस और आरजेडी की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी और जेडीयू इस जीत को नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की नीतियों की स्वीकार्यता बता रही हैं। इसी माहौल में सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “कांग्रेस जल्द ही टूट जाएगी और इसका विभाजन होना तय है।”
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद देशभर में यह बहस तेज हो गई कि क्या वाकई कांग्रेस अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है? क्या बिहार चुनावों के परिणाम, खासकर सिर्फ छह सीटों पर सिमटने के बाद कांग्रेस की स्थिति पहले से ज्यादा कमजोर हो गई है? क्या महागठबंधन की हार कांग्रेस के भविष्य की दिशा तय करेगी? इन सवालों के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख और महाराष्ट्र के अनुभवी नेता शरद पवार ने बड़ा बयान दिया है, जिसने पूरे राजनीतिक माहौल को नई दिशा दे दी है।
सोलापुर में मीडिया से बातचीत करते हुए शरद पवार ने प्रधानमंत्री के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि “मैं जिस कांग्रेस को जानता हूं, वह खत्म होने वाली पार्टी नहीं है। कांग्रेस एक विचार है—गांधी, नेहरू, पटेल और अंबेडकर के सिद्धांतों पर आधारित राजनीतिक सोच। ऐसे विचार मिटाए नहीं जा सकते। कांग्रेस कमजोर भले हो सकती है, लेकिन वह फिर से खड़ी होने की क्षमता रखती है।” पवार के इस बयान को राजनीतिक पंडित कांग्रेस के प्रति उनके भरोसे और विपक्ष की एकजुटता की उम्मीद के रूप में देख रहे हैं।
शरद पवार ने यह भी कहा कि बिहार चुनावों में जो नतीजे आए हैं, उन्हें केवल कांग्रेस या आरजेडी की रणनीति की विफलता नहीं माना जा सकता। उन्होंने महिलाओं को दिए गए आर्थिक लाभ, सामाजिक समीकरणों और नीतीश कुमार की व्यक्तिगत लोकप्रियता को भी परिणाम का बड़ा कारण बताया। पवार ने साफ कहा कि विपक्षी दलों को अब आत्ममंथन की जरूरत है और यह समझना होगा कि जनता किस मुद्दे पर वोट कर रही है।
कांग्रेस पर चल रही आलोचनाओं के बीच पवार ने एक और अहम बात कही। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस के पास अभी भी मजबूत युवा नेतृत्व है, लेकिन पार्टी संरचना में बदलाव की जरूरत है। नए नेतृत्व को मौका देना चाहिए और संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करना होगा।” इस बयान से यह संकेत भी मिलता है कि वे राहुल गांधी की रणनीति पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठा रहे हैं।
पीएम मोदी ने अपने बयान में कहा था कि कांग्रेस अब “मुस्लिम लीगी माओवादी पार्टी” बन गई है और इसमें विभाजन तय है। इस बयान पर भी पवार ने पलटवार किया और कहा कि कांग्रेस का आधार सामाजिक और राष्ट्रीय विचारधारा पर आधारित रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी की मूल आत्मा अभी भी जीवित है, जिसका भारतीय राजनीति में हमेशा महत्व रहेगा।
बिहार की 202 सीटों पर एनडीए की जीत और विपक्ष की भारी हार ने भले ही कांग्रेस को झटका दिया हो, लेकिन शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेताओं का विश्वास बताता है कि कांग्रेस अभी राजनीति से गायब नहीं होने वाली। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में कांग्रेस के भीतर बड़े संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं और विपक्ष को एकजुट रखने में पवार जैसे नेताओं की भूमिका अहम रहने वाली है।
बहरहाल, बिहार के परिणामों को लेकर शुरु हुई यह चर्चा अब राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है। क्या कांग्रेस वास्तव में टूटेगी या फिर नए नेतृत्व और नई रणनीति के साथ उभरेगी—यह आने वाले समय में ही साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि राजनीतिक हलकों में कांग्रेस की प्रासंगिकता और उसके भविष्य पर बहस अभी खत्म नहीं होने वाली।








