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विश्वप्रसिद्ध गुलाबी नगरी जयपुर का स्थापना दिवस राजस्थान ही नहीं, बल्कि भारत के समृद्ध इतिहास और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। 18वीं शताब्दी में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बसाया गया यह शहर अपनी अद्वितीय वास्तुकला, वैभवशाली इतिहास और अनोखी पहचान के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इसी अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए जयपुर की परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को नमन किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जयपुर केवल एक शहर नहीं, बल्कि कला, संस्कृति, शौर्य और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुलाबी नगरी की सुंदरता, यहां की ऐतिहासिक इमारतें, हवेलियां, बाजार, किल्ले और गौरवशाली परंपराएं पूरे विश्व में राजस्थान की पहचान को मजबूत करती हैं। जयपुर की स्थापत्य कला आज भी दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत है, जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर शहर की मान्यता प्रदान कर इसकी महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया है।
जयपुर के स्थापना दिवस पर देशभर से शुभकामनाएं आती हैं। यह शहर न सिर्फ पर्यटन के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी इसकी भूमिका विशेष है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जयपुर की पहचान ‘गुलाबी नगरी’ के रूप में पूरे विश्व में है, और यह गौरव सदियों की सांस्कृतिक यात्रा का परिणाम है। शहर की वास्तुकला में विज्ञान, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। पुरानी बस्तियों की संकरी गलियाँ, हवालियों की भव्यता, मनमोहक द्वारों की नक्काशी, बाजारों की विशिष्ट रौनक और हर रंग में बसती परंपरा जयपुर को अनूठा बनाती है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में जयपुर के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि सवाई जयसिंह द्वितीय की दूरदर्शिता और स्थापत्य कला के ज्ञान का प्रमाण यह शहर है। दुनिया के पहले प्लान्ड शहरों में गिने जाने वाले जयपुर को नौ खंडों में विभाजित कर वैज्ञानिक पद्धति से बसाया गया था, जो उस समय एक अद्भुत औद्योगिक और वास्तु उपलब्धि थी। इसी कारण आज भी जयपुर की शहरी संरचना दुनिया के सामने एक मिसाल है।
जयपुर न सिर्फ अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए, बल्कि आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ते कदमों के लिए भी जाना जाता है। यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों के क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जयपुर की मूल पहचान को संरक्षित रखते हुए इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित स्मार्ट सिटी के रूप में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
स्थापना दिवस के अवसर पर शहर भर में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें स्थानीय कलाकारों ने राजस्थान की रंगीन संस्कृति, लोकगीत और लोकनृत्य के माध्यम से परंपराओं की झलक दिखाई। ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष सजावट की गई और कई स्थानों पर सांस्कृतिक झांकियों ने पर्यटकों का मन मोह लिया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे जयपुर के ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक पहचान को संजोकर रखें। उन्होंने कहा कि जयपुर का गौरव सभी राजस्थानियों का गौरव है, इसलिए हम सभी को इसकी धरोहरों की रक्षा करने और इसे स्वच्छ, सुरक्षित व सुंदर बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
जयपुर की जमीन सिर्फ स्थापत्य कला और संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि अपने वीरों के शौर्य और संघर्ष की कहानियों के लिए भी प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यह शहर हर आगंतुक के मन में अलग ही छाप छोड़ता है।
स्थापना दिवस पर दिया गया यह संदेश न केवल जयपुरवासियों में गर्व की भावना भरता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि हमारे शहर और हमारी विरासत ही हमारी सबसे बड़ी पहचान है। मुख्यमंत्री के शुभकामना संदेश ने गुलाबी नगरी के प्रति प्रेम और सम्मान को एक बार फिर जीवंत कर दिया है।







